केरलम में बढ़ा निपाह, शिगेला और मलेरिया का खतरा, चिकित्सा विभाग हुआ सतर्क
केरलम में मानसून का मौसम आते ही निपाह, शिगेला और मलेरिया जैसी बीमारियां सिर उठाने लगी हैं। कोझिकोड में एक 43 साल के व्यक्ति के निपाह से संक्रमित होने की पुष्टि होने के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। उसके संपर्क में आए 77 लोगों पर भी बारीकी से नजर रखी जा रही है।
वायनाड में 500 से ज्यादा शिगेला के मामले
इस साल शिगेला के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अकेले जून में ही 71 नए मामले सामने आए। वायनाड जिले में 500 से ज्यादा लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें कुओं में क्लोरीनेशन का काम कर रही हैं और लोगों को ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशंस (ORS) भी दे रही हैं। इसी दौरान एक अंतरराज्यीय प्रवासी मजदूर में मलेरिया का मामला सामने आया है, जिससे थोड़ी चिंता बढ़ गई है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि यह संक्रमण राज्य के बाहर से आया है।
केरल का पर्यावरण बढ़ाता है निपाह और मलेरिया का खतरा
केरल के घने जंगल, फल खाने वाले चमगादड़, दलदली क्षेत्र और भारी बारिश निपाह और मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने के लिए आदर्श स्थितियां पैदा करते हैं। ऐसे में अधिकारी लोगों से लगातार अपील कर रहे हैं कि वे साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें, अपने घरों के आसपास मच्छरों को पनपने न दें और अगर किसी को भी इन बीमारियों के लक्षण दिखें, तो तत्काल डॉक्टर से जांच करवाएं।