भीषण गर्मी, सूखा मानसून और बिजली की बेकाबू मांग; कोयले ने संभाली कमान
जून महीने में कोयले से बनने वाली बिजली में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले साल के मुकाबले इस बार इसमें 14 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई, जो पिछले 3 सालों में सबसे ज्यादा है। इस उछाल की मुख्य वजह मौसम है। दरअसल, 1901 के बाद यह जून सबसे सूखा महीना रहा। पूरे देश में पड़ी भयंकर गर्मी ने लोगों को AC और कूलर चलाने पर मजबूर कर दिया, जिससे बिजली की मांग बेतहाशा बढ़ गई। मौसम विभाग के मुताबिक, इस सूखे के पीछे 'अल नीनो' का हाथ है।
रिन्यूएबल एनर्जी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
जून में अक्षय ऊर्जा का हिस्सा बढ़कर रिकॉर्ड 19 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह पिछले साल के मुकाबले 23 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, बैटरी स्टोरेज की कमी के चलते शाम के समय बिजली की बढ़ती मांग को सोलर पावर अभी पूरी तरह से पूरा नहीं कर पाता। वहीं, कमजोर मानसून की वजह से जल विद्युत को बड़ा झटका लगा। इसमें 24 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि बिजली की चरम मांग को पूरा करने के लिए इस वित्त वर्ष में थर्मल पावर, जो मुख्य रूप से कोयले पर आधारित है, उसकी हिस्सेदारी और बढ़ेगी।