3 साल बाद भारत में रिकॉर्डतोड़ बिजली कटौती, अल नीनो ने बढ़ाई मुश्किल
भारत में इस सितंबर में पिछले 3 साल से भी ज्यादा समय की सबसे बड़ी बिजली की कमी हुई। इस बार फैक्ट्रियों और व्यापारिक कामों के लिए बिजली की मांग काफी बढ़ गई थी। लेकिन, बारिश कम होने के कारण जलविद्युत उत्पादन घट गया।
ऐसे में कोयले से चलने वाले बिजली घरों पर ज्यादा बोझ पड़ा और उन्होंने कुल बिजली का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पैदा किया। हैरानी की बात यह है कि रिन्यूएबल एनर्जी से बिजली उत्पादन बढ़ा तो जरूर, लेकिन पिछले महीने के मुकाबले उसकी कुल हिस्सेदारी थोड़ी कम हो गई।
अल नीनो के कारण भारत में जलविद्युत उत्पादन घटा
इस बिजली संकट के पीछे एक बड़ी वजह 'अल नीनो' को बताया जा रहा है। अल नीनो के कारण बारिश कम हुई, जिससे जलविद्युत प्रोजेक्ट ठीक से काम नहीं कर पाए। ऐसे में कोयले से चलने वाले बिजली घरों ने पहले से भी ज़्यादा बिजली पैदा की, जो पिछले साल से 13.3 प्रतिशत ज्यादा थी। लेकिन, एक चुनौती यह भी थी कि उनमें से करीब 5 में से 2 बिजली घरों के पास ईंधन की कमी थी।
वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी को स्टोर करने के लिए मौजूद बैटरी स्टोरेज भी, बिजली की सबसे ज्यादा मांग वाले समय में कोई खास मदद नहीं दे पाया। एलारा सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट रूपेश सांखे ने इस पूरे मामले पर कहा कि, उद्योगों की ज्यादा मांग और बिजली घरों के रखरखाव के काम की वजह से बिजली सप्लाई नेटवर्क पर दबाव और बढ़ गया।