भारत में शादी से जुड़ी आत्महत्याओं का भयावह सच: अब 53 प्रतिशत पुरुष शिकार
2024 में भारत में शादी से जुड़े कुल 8,524 आत्महत्या के मामलों में पुरुषों की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत रही। लगातार तीसरे साल पुरुषों की संख्या इसमें ज्यादा दर्ज की गई है। पहले के सालों से तुलना करें तो यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि तब इन मामलों में महिलाओं की संख्या अधिक होती थी। पिछले 10 सालों में शादी से जुड़ी पुरुषों की आत्महत्याओं में 82 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। दूसरी तरफ, महिलाओं से जुड़े ऐसे मामले हर साल लगभग 3,900 के आसपास बने हुए हैं।
शादी से जुड़ी आत्महत्याओं में दहेज मुख्य वजह
पुरुषों के मामलों में 'शादी का न बस पाना' (43 प्रतिशत) सबसे बड़ी वजह रही है। जबकि महिलाओं की आत्महत्याओं के पीछे दहेज (34 प्रतिशत) अभी भी सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। इन आत्महत्याओं के कुल आंकड़ों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा। उम्र के हिसाब से देखें तो, ज्यादातर महिलाएं जिनकी मौत हुई, वे 30 साल से कम उम्र की थीं, वहीं 53 प्रतिशत पुरुष 30 साल से ज्यादा उम्र के थे। यह जानकारी बताती है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों पर किस तरह का बढ़ता दबाव है।