कुष्ठ रोग का डरावना सच: भारत में बच्चों के मामले लक्ष्य से दोगुने, विकलांगता का खतरा
भारत में बच्चों में कुष्ठ रोग के मामले तेजी से बढ़े हैं। 2025-26 में ऐसे 3,832 मामले दर्ज हुए हैं, जो उस साल के तय लक्ष्य से लगभग दोगुने हैं। कुछ बच्चों में तो कुष्ठ रोग का देर से पता चलने के कारण गंभीर विकलांगता भी आ गई है। यह स्थिति तब है जब भारत 2027 तक जिला स्तर पर इस बीमारी के फैलने को रोकने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद हर जिले में लगातार पांच साल तक कुष्ठ रोग के बच्चों के नए मामले शून्य करना है।
भारत में सामने आए कुष्ठ रोग के 91,783 नए मामले
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 2025 की वैश्विक रिपोर्ट में भारत में कुष्ठ रोग के नए मामले दुनिया में सबसे ज्यादा थे। भारत की रिपोर्टिंग अवधि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक की थी, जिसमें कुल 91,783 मामले दर्ज किए गए। WHO बच्चों में होने वाले मामलों पर नजर रखता है, ताकि यह पता चल सके कि यह बीमारी कितनी फैल रही है। हालांकि, सभी मरीजों को, खासकर छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों में, जल्दी खोजना और उनका इलाज करना मुश्किल साबित होता है। दिल्ली के डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में त्वचा विज्ञान के प्रोफेसर डॉ कबीर सरदाना बताते हैं कि इस बीमारी से जुड़ा कलंक और देर से इसका पता चलना बड़ी समस्याएँ हैं। उन्होंने कहा, "डाटा यह दिखाता है कि बीमारी का पता सही समय पर नहीं चल पा रहा है, यही वजह है कि हमें बच्चों में कुष्ठ रोग के ज्यादा मामले देखने को मिल रहे हैं।"