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#NewsBytesExplainer: रूसी तेल खरीदने के चलते भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ, ये कितनी चिंता की बात?
भारत समेत रूस से तेल खरीदने वाले 5 देशों पर अमेरिका 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है

#NewsBytesExplainer: रूसी तेल खरीदने के चलते भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ, ये कितनी चिंता की बात?

लेखन आबिद खान
Aug 08, 2026
05:55 pm

क्या है खबर?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ को लेकर विवादित फैसले लेना जारी रखे हुए हैं। अब अमेरिकी संसद ने ऐसे विधेयक को पारित किया है, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इन देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। अगर ये विधेयक कानून बनता है, तो भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लग सकता है। आइए समझते हैं इसका क्या असर हो सकता है।

विधेयक

सबसे पहले विधेयक के बारे में जानिए

इस विधेयक का नाम 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' है। विधेयक का विचार सबसे पहले दिवंगत अमेरिकी सांसद और ट्रंप के करीबी लिंडसे ग्राहम ने सामने रखा था। उनके निधन के बाद विधेयक को ये नाम दिया गया है।

अमेरिकी संसद में विधेयक के पक्ष में 86, जबकि विरोध में 11 सांसदों ने वोट किया।

अब विधेयक को अगले महीने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पेश किया जाएगा।

प्रावधान

विधेयक में क्या-क्या प्रावधान हैं?

विधेयक में रूसी ऊर्जा के शीर्ष 5 खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। विधेयक के पिछले मसौदे में 500 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान था, जिसे अब 100 प्रतिशत किया गया है।

विधेयक में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित रूसी नेताओं, अधिकारियों और वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है।

विधेयक के जरिए 1996 का 'ईरान प्रतिबंध कानून' भी 2031 तक बढ़ जाएगा। इसके तहत ईरान के साथ व्यापार करने वाली गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी है।

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भारत

भारत के सामने क्या है चिंता की बात?

भारत अपनी कुल जरूरत का 88 प्रतिशत से भी ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। फिलहाल इसका आधे से भी ज्यादा हिस्सा रूस से आता है।

ईरान युद्ध के चलते वैसे ही वैश्विक ऊर्जा को लेकर संकट की स्थिति है। ऐसे में भारत के लिए रूसी तेल आयात को कम करने का विकल्प भी नहीं है।

होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद खाड़ी देशों से आपूर्ति प्रभावित हुई है। ऐसे में रूस अहम विकल्प बनकर उभरा है।

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विशेषज्ञ

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए केप्लर में मॉडलिंग और रिफाइनिंग मैनेजर सुमित रितोलिया ने कहा, "विधेयक से रूसी कच्चे तेल की आपू्र्ति से जुड़ी नीतिगत चिंताएं बढ़ गई हैं, लेकिन इससे भारत या चीन की खरीद को लेकर हमारे निकट भविष्य के नजरिए में कोई बदलाव नहीं आया है। इन उपायों को अभी कई कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना है। असल असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन इन्हें कितनी सख्ती से लागू करता है।"

राहत

भारत के लिए क्या है थोड़ी राहत की बात?

जानकारों के मुताबिक, विधेयक में अमेरिका से रियायतें और वैकल्पिक रास्ते निकालने की कुछ गुंजाइश है। अगर विधेयक कानून बनता है, तो भारत छूट की मांग करेगा।

इंडियन एक्सप्रेस से ऊर्जा विशेषज्ञ नतालिया काटोना ने कहा था, "भारत निश्चित रूप से छूट के लिए जोर देगा और अमेरिका के लिए एक दोस्ताना रियायत के तौर पर इसे मान लेना सही होगा, खासकर यह देखते हुए कि भारत के लिए स्थिति कितनी गंभीर है।"

दुनिया

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या होगा असर?

काटोना ने कहा, "विधेयक लाए जाने का समय बहुत खराब है। खाड़ी क्षेत्र में संकट के दौरान रूसी तेल को बाजार से बाहर करने की कोशिश खतरनाक और विस्फोटक हो सकती है। ब्रेंट क्रूड पहले ही 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही में भारी कमी आई है। ऐसे में रूसी सप्लाई में से कई मिलियन बैरल तेल हटाना या ऐसा करने की धमकी देना कीमतों में फिर से भारी उछाल की वजह बन सकता है।"

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