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चीन की कट्टर आलोचक जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की जीत से भारत को क्या होगा फायदा?
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल नवंबर में G-20 शिखर सम्मेलन में मुलाकात हुई थी (फाइल तस्वीर)

चीन की कट्टर आलोचक जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की जीत से भारत को क्या होगा फायदा?

लेखन गजेंद्र
Feb 09, 2026
07:51 pm

क्या है खबर?

जापान के चुनावों में प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने भारी जीत हासिल की है। उनको निचले सदन प्रतिनिधि सभा में दो-तिहाई बहुमत मिला है। पिछले साल अक्टूबर में 64 वर्षीय ताकाइची पहली महिला और 104वीं प्रधानमंत्री बनी थीं। फरवरी में अचानक हुए चुनावों में यह जीत द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे बड़ी जीत बताई जा रही है। चीन की मुखर आलोचक रूढ़ीवादी ताकाइची का प्रधानमंत्री बनना भारत के लिए कितना फायदेमंद है? आइए, जानते हैं।

जीत

क्यों बड़ी मानी जा रही है जीत?

अक्टूबर में प्रधानमंत्री बनने के मात्र 110 दिनों की सत्ता के बाद ताकाइची ने स्नैप इलेक्शन यानी अचानक चुनावों में जीत दर्ज की है। LDP ने 465 में 316 सीट जीती, जो अकेले बहुमत से अधिक है। हालांकि, गठबंधन से उसका आंकड़ा 352 पहुंचा। चुनाव से पहले LDP के पास 198 सीटें थीं। यह LDP की 1955 में स्थापना के बाद सबसे बड़ी जीत है। इससे ताकाइची को उच्च हाउस (जिसमें बहुमत नहीं) को ओवरराइड करने की ताकत मिली है।

फायदा

ताकाइची की जीत से भारत को कितना फायदा?

चीन के प्रति कट्टर रुख अपनाने वाली ताकाइची की जीत को विश्लेषक भारत के लिए सकारात्मक मान रहे हैं और उसे रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखते हैं। उनकी जीत से भारत-जापान संबंध मजबूत होंगे और चीन के खिलाफ बैलेंस बनाने में मुख्य भूमिका निभाएंगे। सुरक्षा और रक्षा सहयोग के मामले में ताकाइची भारत को "क्वासी-अलायंस" (अर्ध-गठबंधन) सहयोगी मानती हैं, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र और क्वाड समूह (भारत, जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) मजबूत होगा। रक्षा, साइबर सुरक्षा, AI, सेमीकंडक्टर में सहयोग बढ़ेगा।

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रक्षा

भारत और जापान के बीच कितने गहरे संबंध?

भारत-जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक सहयोग 2014 से है, जो सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित है। वर्ष 2027 में कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे होंगे। वर्ष 2008 से दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त बयान, क्वाड में सक्रिय, रक्षा सहयोग (जैसे हथियार ट्रांसफर, संयुक्त युद्धाभ्यास) और 2025 में AI, अंतरिक्ष, हाई-स्पीड रेल और सेमीकंडक्टर में सहयोग बढ़ा है। दोनों के बीच आपूर्ति चेन को मजबूत करने और आर्थिक दबाव के खिलाफ सहयोगी हैं।

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फायदा

भारत और जापान के बीच कैसा है व्यापारिक रिश्ता?

भारत-जापान के बीच मुख्य व्यापार औद्योगिक सामान, मशीनरी और कच्चे माल पर आधारित है। भारत कार, टेलीफोन, कच्चा एल्युमिनियम, ऑर्गेनिक केमिकल्स, मछली, जलीय उत्पाद निर्यात करता है, जबकि जापान से रिफाइंड कॉपर, मोटरवाहन पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, आयरन-स्टील आदि आयात करता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत-जापान द्विपक्षीय व्यापार करीब 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इसमें जापान से आयात 75 और निर्यात हिस्सा 25 प्रतिशत रहा है। यह द्विपक्षीय व्यापार 2025 तक 6 लाख करोड़ करने का लक्ष्य है।

विरोध

ताकाइची के चीन विरोधी होने से भारत पर कितना असर?

ताकाइची को "चीन हॉक" यानी चीन पर नजर रखने वाला बाज कहते हैं क्योंकि वे चीन की आक्रामक नीतियों (जैसे ताइवान, साउथ चाइना सी, इंडो-पैसिफिक में विस्तारवाद) के खिलाफ सख्त रुख अपनाती हैं। वह जापान की रक्षा क्षमता बढ़ाना, अमेरिका के साथ मजबूत गठबंधन और 'मुक्त-खुले हिन्द-प्रशांत क्षेत्र' (FOIP) को बढ़ावा देती हैं, जो भारत के लिए अनुकूल है। चीन के खिलाफ प्रमुख मंच क्वाड को ताकाइची से फायदा मिलेगा। उनके रक्षा बजट बढ़ाने से भारत को लाभ होगा।

बधाई

प्रधानमंत्री मोदी ने जीत की बधाई दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताकाइची की जीत पर उनको बधाई देते हुए एक्स पर लिखा, 'प्रतिनिधि सभा के चुनावों में ऐतिहासिक जीत पर सनाए ताकाइची को बधाई! हमारी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुझे विश्वास है कि आपके सक्षम नेतृत्व में, हम भारत-जापान दोस्ती को और ऊंचाइयों पर ले जाना जारी रखेंगे।'

जवाब

प्रधानमंत्री ताकाइची ने बधाई पर धन्यवाद कहा

ताकाइची ने प्रधानमंत्री मोदी के बधाई संदेश का जवाब देते हुए एक्स पर लिखा, 'संसदीय चुनाव में जीत हासिल करने पर हार्दिक बधाई देने के लिए धन्यवाद। जापान-भारत के विशेष, रणनीतिक तथा वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने और 'मुक्त एवं खुले हिन्द-प्रशांत क्षेत्र' (FOIP) को साकार करने की दिशा में आगे भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।'

संबंध

भारत के साथ संबंधों पर बयान दे चुकी हैं ताकाइची

ताकाइची ने अक्टूबर में प्रधानमंत्री बनने के बाद 24 अक्टूबर, 2025 को जापानी संसद में अपने पहले संबोधन में, भारत को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बताया था। उन्होंने कहा था कि टोक्यो की कूटनीति के मुख्य स्तंभ, एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक को बढ़ावा देने के लिए, भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार है। इसके अलावा नवंबर, 2025 को G-20 शिखर सम्मेलन में, उन्होंने जापान-भारत संबंधों को अधिक मजबूत-समृद्ध बनाने के लिए मिलकर काम करने की इच्छा जताई थी।

पहचान

कौन है सनाए ताकाइची?

जापान की 'आयरन लेडी' ताकाइची का जन्म 7 मार्च, 1961 को हुआ था। वह पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की करीबी हैं। वर्ष 1993 में पहली बार सांसद बनी ताकाइची ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है। वह सरकार में आंतरिक मामलों और आर्थिक सुरक्षा विभाग संभाल चुकी हैं। वर्ष 2024 में घोटालों से त्रस्त सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष पद के चुनाव में वह दूसरे स्थान पर थीं। ताकाइची ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की प्रशंसक हैं।

जानकारी

कट्टर रूढ़ीवादी नेता भी हैं ताकाइची?

ताकाइची का रूढ़िवादी विचारों और द्वितीय विश्व युद्ध की विरासत से जुड़े मुद्दों पर रुख आक्रामक है। उन्होंने कई बार यासुकुनी तीर्थस्थल जाने की बात कही है, जहां जापानी सैनिकों की स्मृति में पूजा होती है। चीन-दक्षिण कोरिया इस पर आपत्ति जता चुके हैं।

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