सुप्रीम कोर्ट में 2,000 रुपये से कम के गुप्त चंदे पर चुनौती, क्या खुलेगा नेताओं के फंडिंग का राज?
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है। इस याचिका में उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत राजनीतिक पार्टियां 2,000 से कम के गुमनाम नकद चंदे ले सकती हैं। याचिका दायर करने वाले खेम सिंह भाटी का कहना है कि यह नियम एक बड़ी खामी है, जिससे संदिग्ध पैसा आसानी से राजनीति में आ जाता है। इससे मतदाताओं को यह पता नहीं चल पाता कि उनके नेताओं को पैसा कौन दे रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता इस मामले की सुनवाई करेंगे।
याचिका में दानदाताओं की जानकारी की मांग
भाटी की याचिका में कई बड़े बदलावों की मांग की गई है। इनमें सभी दानदाताओं की जानकारी सार्वजनिक करना, नकद चंदे पर पूरी तरह से रोक लगाना और चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त किए गए ऑडिटरों से पार्टियों के वित्तीय मामलों का स्वतंत्र ऑडिट कराना शामिल है। इसके अलावा चंदे से जुड़ी रिपोर्टों पर और कड़ी नजर रखने की बात भी याचिका में कही गई है। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2024 के उस फैसले का भी जिक्र किया गया है, जो इलेक्टोरल बॉन्ड के खिलाफ था। याचिका का कहना है कि राजनीतिक फंडिंग में और ज्यादा पारदर्शिता आनी चाहिए, क्योंकि एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह बेहद जरूरी है।