हरियाणा के सिख तीर्थयात्रियों का जत्था पाकिस्तान सीमा से लौटा, वीजा के बावजूद नहीं मिला प्रवेश
क्या है खबर?
गुरु अर्जन देव के शहीदी गुरुपर्व पर पाकिस्तान के गुरुद्वारे जाना चाह रहे हरियाणा के 94 सिख तीर्थयात्रियों के जत्थे को पाकिस्तान सीमा पर प्रवेश देने से मना कर दिया गया। दैनिक भास्कर के मुताबिक, तीर्थयात्रियों ने वीजा और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे, लेकिन अंतिम समय में भारत सरकार की ओर से अनुमति न मिलने पर उन्हें लौटना पड़ा। हालांकि, दिल्ली और पंजाब के 500 से अधिक सिख तीर्थयात्रियों को अटारी-वाघा सीमा से प्रवेश मिल गया।
प्रवेश
9 जून को हरियाणा से चला था सिख जत्था
रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा से 94 सिखों का जत्था 9 जून को कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही से पाकिस्तान में होने वाले गुरु अर्जन देव के शहीदी समागम लिए रवाना हुआ था। जत्थे को पाकिस्तान में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा, डेरा साहिब और पंजा साहिब समेत कई अन्य गुरुद्वारों के भी दर्शन करने थे। वे बुधवार को अमृतसर पहुंच गए थे। हालांकि, सीमा पार करने की अनुमति न मिलने पर इंतजार करते रहे।
कारण
क्यों नहीं मिला प्रवेश?
पाकिस्तान की यात्रा के लिए 1 जून को हरियाणा के सभी अधिकारियों के पास नोटिफिकेशन पहुंचा था। इसके बाद तीर्थयात्रियों ने अपना पोसपोर्ट और शुल्क समेत अन्य दस्तावेज हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी में जमा करा दिया। बताया जा रहा कि हरियाणा के अधिकारियों ने यात्रियों की अनुमति के लिए गृह विभाग को जरूरी सिफारिश नहीं भेजी, जिससे 94 यात्रियों को अनुमति नहीं मिली। सीमा पर भी तीर्थयात्री गृह मंत्रालय से अनुमति मांगते रहे, लेकिन उन्हें मायूस लौटना पड़ा।
ट्विटर पोस्ट
पाकिस्तान सीमा से वापस लौटा सिख जत्था
A group of 94 Sikh pilgrims from Haryana, who had departed for a pilgrimage to Sikh shrines in Pakistan, was denied entry at the Attari-Wagah border today and sent back. Sources said that only the Haryana contingent was stopped, while other pilgrimage groups were allowed to… pic.twitter.com/sxSpWJVOyE
— Akashdeep Thind (@thind_akashdeep) June 11, 2026
जानकारी
14 साल में पहला सिख जत्था
पाकिस्तान गया जत्था 19 जून को लौटेगा। लाहौर में गुरु अर्जन देव की शहादत की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित धार्मिक सभा में भाग लेने वाला यह पिछले 14 वर्षों में पहला सिख जत्था है। गुरु अर्जन देव लाहौर में शहीद हुए थे।