हार्वर्ड की चिंताजनक रिपोर्ट: प्रदूषण ने रोकी धूप, अब 20 करोड़ भारतीयों को झुलसाएगी आने वाली 'छिपी' गर्मी
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक नई रिसर्च बताती है कि 1980 के दशक से अब तक भारत की जमीन का तापमान 0.88 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। वहीं, पूरी दुनिया में औसत तापमान 1.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। इस लिहाज से भारत में यह बढ़ोतरी कम है। वैज्ञानिक मानते हैं कि हवा में फैला प्रदूषण सूरज की रोशनी को धरती तक पूरी तरह पहुंचने नहीं दे रहा है। इसी वजह से जमीन की सतह उतनी गर्म नहीं हो पा रही, जितनी होनी चाहिए थी। हालाँकि, यह 'ठंडक' कोई अच्छी खबर नहीं है। असल में यह एक छिपी हुई मुसीबत है, जो आने वाले समय में और भी खतरनाक रूप ले सकती है।
पेपर ने चेतावनी दी है: 20 करोड़ हिंदुस्तानी खतरे में
रिसर्च में बताया गया है कि उत्तरी भारत में बढ़ता प्रदूषण और खेतों की सिंचाई, दोनों मिलकर तापमान को कम बढ़ने दे रहे हैं। कई बार तो सर्दियों में तापमान घटने भी लगता है। लेकिन ये 'ठंडी' स्थिति लंबे समय तक राहत नहीं दे पाएगी। आने वाले वक्त में हालात और बिगड़ सकते हैं। यह रिसर्च चेतावनी देती है कि साल 2030 तक भारत में करीब 20 करोड़ लोगों को खतरनाक स्तर की गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। चिंता की बात यह है कि देश के केवल 8 प्रतिशत घरों में ही एयर कंडीशनिंग (AC) लगी है। ऐसे में इतनी बड़ी आबादी गर्मी से अपना बचाव कैसे कर पाएगी, यह एक बड़ा सवाल है। इस स्टडी में सुझाव दिया गया है कि सरकार को बेहतर हीट एक्शन प्लान बनाने चाहिए और ऐसी नीतियां लानी चाहिए, जिनसे लोग बढ़ती गर्मी और कभी भी आ जाने वाली बारिश, दोनों से निपटने के लिए तैयार हो सकें।