गुवाहाटी HC का बड़ा फैसला, कहा- BNS 2023 के तहत मुस्लिमों का दूसरा निकाह बहुविवाह नहीं
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत, मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक किसी पुरुष का दूसरा निकाह 'बिगैमी' (बहुविवाह) नहीं माना जाएगा। इसी आधार पर कोर्ट ने पहली पत्नी द्वारा दायर किए गए एक आपराधिक मामले को खारिज कर दिया। जस्टिस मृदुल कुमार कलिता ने साफ किया कि इस कानून में केवल 5वां निकाह ही 'बिगैमी' के दायरे में आता है, जबकि बाकी सभी निकाह वैध माने जाते हैं।
असम अधिनियम के तहत पंजीकरण न होना शून्य नहीं
पति के वकील ने दलील दी कि दूसरा निकाह मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत पूरी तरह से कानूनी है और यह BNS के सेक्शन 82 का उल्लंघन नहीं करता। उन्होंने बताया कि यह धारा केवल उन विवाहों पर लागू होती है जो शुरू से ही शून्य होते हैं। कोर्ट ने असम मुस्लिम विवाह और तलाक के अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024 के तहत शादी के पंजीकरण की अनिवार्यता पर भी विचार किया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ पंजीकरण न होने से कोई शादी शून्य नहीं हो जाती।