क्या है ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला?
क्या है खबर?
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता (27) की मौत का मामला तूल पकड़ रहा है और लोग प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं। शुक्रवार को युवराज की सेक्टर-150 स्थित एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में डूबने से मौत हो गई थी। युवराज के पिता ने पुलिस-प्रशासन से मदद भी मांगी थी, लेकिन कोई समय पर नहीं पहुंचा। घटना को लेकर लोग सड़क पर उतरे हैं। पूरा मामला क्या है? आइए, जानते हैं।
घटना
कब और कैसे हुई थी युवराज की मौत?
युवराज गुरूग्राम स्थित एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। वे शुक्रवार की रात घर लौट रहे थे, तभी घने कोहरे के कारण उनकी कार नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र स्थित सेक्टर-150 में निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में गिर गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉल के बेसमेंट के लिए जो गहरा गड्ढा खोदा गया था, वह काम बीच में रुकने के बाद भरा नहीं गया और पानी भरने के कारण दलदल बन गया। इसी दलदल में युवराज की गाड़ी गिर गई थी।
खामी
बेसमेंट में गिरने के बाद युवराज ने पिता को किया था फोन
मृतक युवराज के पिता राज कुमार मेहता ने बताया कि शुक्रवार की रात करीब 12 बजे उनके बेटे का फोन आया था और गड्ढे में गिरने की बात कही थी। वह कोहरे के कारण आधे घंटे तक घटनास्थल को ढूंढते रहे। इसके बाद युवराज ने फोन की लाइट जलाकर उन्हें इशारा किया। युवराज के पिता ने पुलिस को फोन किया। उसके बाद, दमकल और बचाव कर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन किसी ने युवराज को बचाने के लिए जहमत नहीं उठाई।
आरोप
कोई पानी के अंदर नहीं उतर सका- पिता
पिता राजकुमार मेहता ने बताया कि पुलिस और अन्य बचाव अधिकारियों ने रस्सी फेंकने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पुलिस, दमकल विभाग और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की मौजूदगी के बावजूद, तत्काल बचाव का कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बचाव दल ने जमा देने वाले पानी और उसके अंदर लोहे की छड़े होने से खतरे का हवाला देते हुए पानी में उतरने से इनकार कर दिया था।
कार्रवाई
पिता की शिकायत पर कार्रवाई
राजकुमार ने घटना के बाद पुलिस में शिकायत दी है, जिसमें 2 बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन व लोटस ग्रीन के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही सेक्टर-150 क्षेत्र के आसपास ड्यूटी पर तैनात यातायात कर्मियों को नोटिस जारी हुआ है। नोएडा प्राधिकरण ने नोएडा ट्रैफिक सेल विभाग के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। मामले की जांच जारी है।
हादसा
अगर 31 दिसंबर को लेते सबक, तो न होती युवराज की मौत
जहां युवराज की डूबकर मौत हुई है, वहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन नोएडा प्राधिकरण और पुलिस ने कभी ध्यान नहीं दिया। 31 दिसंबर की रात एक ट्रक भी उसी गड्डे में गिर गया था। उसे बाहर निकालने में 2 दिन लगे थे। अगर उसी समय गड्ढा भर दिया जाता, तो युवराज की मौत नहीं होती। घटना के बाद ग्रेटर नोएडा में यूरेका पार्क सोसाइटी निवासियों ने कैंडल मार्च निकालकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।