उत्तराखंड के ग्लेशियरों का चौंकाने वाला सच, गंगा-यमुना पर मंडराया अभूतपूर्व जल संकट
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एक नए अध्ययन में सामने आया है कि उत्तराखंड के ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल वॉर्मिंग और बदलता मौसम है। ये ग्लेशियर गंगा और यमुना जैसी बड़ी नदियों को पानी देते हैं। इनके तेजी से पिघलने का असर भारत और पड़ोसी देशों में सिंचाई, पीने के पानी और हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर भी पड़ेगा।
हर साल करीब 37.8 मीटर सिकुड़ रहा मिलाम ग्लेशियर
मिलाम ग्लेशियर हर साल करीब 37.8 मीटर सिकुड़ रहा है। वहीं, खटलिंग ग्लेशियर इससे भी तेजी से पिघल रहा है, जो सालाना लगभग 88 मीटर है। गंगोत्री ग्लेशियर भी पीछे नहीं है, यह भी हर साल 22.02 मीटर सिकुड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ग्लेशियरों का इतनी तेजी से पिघलना ग्लेशियल झीलों से अचानक आने वाली बाढ़ जैसे खतरों को बढ़ा सकता है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन को देखते हुए लगातार रिसर्च करना और हालात के हिसाब से खुद को ढालना बहुत जरूरी है।