FSSAI की बड़ी कार्रवाई: 20 प्रतिशत खाना असुरक्षित मिला, अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा 'लाल चेतावनी' का भविष्य
भारत का खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI रेस्तरां और पैकेटबंद खाद्य ब्रांडों पर अपनी जांच बढ़ा रहा है। 2020 से हर साल एक लाख से ज्यादा सैंपल जांचे गए हैं, जिनमें से लगभग 20 प्रतिशत असुरक्षित या घटिया पाए गए।
उपभोक्ता लंबे समय से खाने-पीने की जगहों पर खराब साफ-सफाई की शिकायत कर रहे हैं। इसी वजह से, पिछले 3 सालों में करीब 8,000 खाद्य व्यापार लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।
FSSAI के 'लाल चेतावनी' नियम पर अदालत में सुनवाई
हाल ही में हुई अचानक छापेमारी में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पेप्सिको और नेस्ले जैसे बड़े ब्रांडों के उत्पादों पर नकली लेबल लगे मिले, वहीं मिलावटी पनीर भी जब्त किया गया।
FSSAI अब उन खाद्य पदार्थों पर लाल चेतावनी वाले लेबल लगाना चाहता है जिनमें सैचुरेटेड फैट, चीनी या नमक में से कोई भी 2 या उससे ज्यादा चीजें ज्यादा मात्रा में हों। हालांकि, उद्योग समूहों का कहना है कि ये नियम बहुत सख्त हैं, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ये उतने सख्त नहीं हैं जितने होने चाहिए। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट 10 सितंबर को सुनवाई करेगा।