जम्मू के रघुनाथ मंदिर में पहली बार महिलाओं ने की आरती, टूटी सदियों की परंपरा
जम्मू के 1835 में बने रघुनाथ मंदिर में पहली बार शाम की आरती की जिम्मेदारी महिलाओं ने संभाली। यह भूमिका सदियों से पुरुष ही निभाते आ रहे थे। इस पहल की शुरुआत करने वाली कुंवरानी रीता सिंह का मानना था कि मंदिर की परंपराओं को और भी समावेशी बनाया जा सकता है। भगवा साड़ी पहने महिलाओं ने भजन गाए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, जो लैंगिक समानता की दिशा में एक अहम कदम है।
कुंवरानी रीता सिंह ने 150 महिलाओं को सिखाया
पिछले एक साल से कुंवरानी रीता सिंह 150 महिलाओं को मंदिर के रीति-रिवाजों का प्रशिक्षण दे रही हैं। उनकी योजना है कि अब वे उन्हें हवन जैसे दूसरे अनुष्ठान भी सिखाएं। भक्तों ने इस खास पल को बेहद प्रेरणादायक बताया। मिनी बगोत्रा ने कहा, "मैंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं सोचा था कि मैं महिलाओं को आरती करते देख पाऊंगी।" यह बदलाव सिर्फ महिलाओं को सशक्त बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी आस्था आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।