नेपाल में 450 मौतें, अब बिहार पर मंडरा रहा कोसी का खतरा
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस बाढ़ में 450 से ज्यादा लोग मारे गए और 1,000 से ज्यादा लापता हो गए। इसका असर पड़ोसी भारतीय राज्यों पर भी पड़ा है, खासकर बिहार में चिंता बढ़ गई है।
बिहार नेपाल के साथ कई नदियां साझा करता है और मानसून के मौसम में यहां बार-बार बाढ़ का खतरा रहता है। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चिंता कोसी नदी को लेकर है।
कोसी अपने अप्रत्याशित व्यवहार के लिए जानी जाती है। याद कीजिए, 2008 में आई बाढ़ ने बिहार के 20 लाख से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया था। इस नदी का परेशानी पैदा करने का एक लंबा इतिहास रहा है।
कोसी की गाद बिहार के लिए खतरा
कोसी नदी हिमालय से भारी मात्रा में गाद और मिट्टी बहाकर लाती है। यह गाद नदी के तल को ऊपर उठा देती है, जिससे नदी के अचानक रास्ता बदलने की संभावना बढ़ जाती है। दशकों पहले इसे नियंत्रित करने के लिए तटबंध बनाए गए थे, लेकिन मानसून के दौरान भारी बारिश, भूस्खलन और ग्लेशियर झीलें फटने से इस नदी को संभालना बिहार के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। सीधी बात यह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद, कोसी से आने वाली बाढ़ आस-पास रहने वाले लोगों के लिए एक गंभीर खतरा बनी हुई है।