FCI ने इथेनॉल निर्माताओं को खरीद लागत से 40 प्रतिशत कम दाम पर बेचा चावल
क्या है खबर?
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर देशभर में मचे हाहाकार के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने इथेनॉल निर्माताओं को खरीद लागत से 40 प्रतिशत कम दाम पर चावल बेंचा है। यह जानकारी मंगलवार को राज्यसभा में दी गई। खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने कहा कि FCI ने 12 महीने की अवधि में अपने गोदामों से 14,596.78 करोड़ रुपये मूल्य का 63.50 लाख टन चावल इथेनॉल संयंत्र भेजा है।
जवाब
40 प्रतिशत कम दाम पर बेंचा चावल
बंभानिया ने सांसद अशोक सिंह के सवाल पर लिखित जवाब में बताया, जून 2025 और जून 2026 के बीच इथेनॉल डिस्टिलरी को 2,250-2,320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से चावल बेचा गया, जो इसकी औसत अधिग्रहण लागत 3,720-3,889 रुपये प्रति क्विंटल से लगभग 40 प्रतिशत कम है।
इसमें हरियाणा को सबसे अधिक 844,141 टन, उत्तर प्रदेश को 838,645 टन, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को मिलाकर 658,952 टन, बंगाल को 584,672 टन और मध्य प्रदेश को 432,485 टन अनाज प्राप्त हुआ।
जवाब
FCI अधिग्रहण लागत से कम थी चावल की कीमत
रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू खुले बाजार बिक्री योजना (OMSSD) के तहत, इथेनॉल उत्पादन के लिए चावल की कीमत जून से अक्टूबर 2025 के बीच 2,250 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई थी।
नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 की अवधि के लिए यह दर बढ़ाकर 2,320 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई। नवंबर 2026 से जून 2027 के लिए सरकार ने कीमत 2,390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की है।
ये दरें FCI की औसत अधिग्रहण लागत से काफी कम थीं।
लागत
क्या है अधिग्रहण लागत से तात्पर्य?
अधिग्रहण लागत का मतलब उस खर्च से है, जो FCI किसानों से चावल खरीदते समय मूल्य चुकाता है। यानी उसने चाव 3,720 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा, जबकि इथेनॉल निर्माता को 2,250 रुपये प्रति क्विंटल घाटे पर बेंच दिया।
आर्थिक लागत अधिक होती है क्योंकि इसमें अनाज वितरण-बिक्री से पहले होने वाले भंडारण, परिवहन-ढुलाई लागत जैसे खर्च भी शामिल होते हैं।
FCI की अधिग्रहण लागत 2024-25 में 3,719.72 प्रति क्विंटल थी और 2025-26 में बढ़कर 3,889.46 प्रति क्विंटल हो गई।