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दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' बनाने वाले मूर्तिकार राम सुतार का निधन
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाने वाले मूर्तिकार रामवन सुतार का निधन

दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' बनाने वाले मूर्तिकार राम सुतार का निधन

लेखन गजेंद्र
Dec 18, 2025
12:30 pm

क्या है खबर?

गुजरात के केवड़िया में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वनजी सुतार का गुरुवार को निधन हो गया। उनके बेटे अनिल ने बताया कि रामवन ने नोएडा स्थित घर में गुरुवार तड़के अंतिम सांस ली। वह करीब 100 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 11 बजे नोएडा में ही किया जाएगा। रामवन सुतार के निधन पर राजनीतिक हस्तियों ने शोक जताया है और सोशल मीडिया पर अपनी श्रद्धांजलि दी है।

परिचय

संसद में गांधी प्रतिमा और सरदार पटेल की मूर्ति बनाकर खींचा दुनिया का ध्यान

रामवन ने कई मूर्तियां बनाई हैं, लेकिन 2018 में केवड़िया में सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची कांस्य प्रतिमा की डिजाइन देकर दुनिया का ध्यान खींचा था। इससे पहले उन्होंने 170 से अधिक देशों के लिए महात्मा गांधी की 350 मूर्तियां बनाई। संसद भवन में बैठी गांधी प्रतिमा और कर्नाटक के विधान सौधा में बनी प्रतिमा भी इन्होंने बनाई थी। बेंगलुरु एयरपोर्ट पर केम्पेगौड़ा की 108 फुट ऊंची प्रतिमा, कुरुक्षेत्र में कृष्ण-अर्जुन रथ मूर्ति समेत अन्य प्रतिमा भी बनाई।

जीवन

महाराष्ट्र से आए थे दिल्ली

रामवन सुतार का जन्म फरवरी 1925 को महाराष्ट्र में धुले के गोन्दुर गांव में हुआ था। उनके पिता वनजी हंसराज बढ़ई थे। रामवन ने शिल्पकला में रुचि की वजह से बॉम्बे के सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लिया। उन्होंने औरंगाबाद के पुरातत्व विभाग में अजंता-एलोरा की गुफाओं में प्राचीन मूर्तियों के पुनर्स्थापन का कार्य किया। वे सूचना-प्रसारण मंत्रालय में तकनीकी सहायक रहे। बाद में 1959 में नौकरी छोड़कर स्वतंत्र मूर्तिकार बने। उन्होंने नोएडा में स्टूडियो स्थापित किया था।

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दुख

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम सुतार के निधन पर दुख जताते हुए उन्हें असाधारण मूर्तिकार बताया और परिवार के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने एक्स पर तस्वीर साझा कर लिखा कि राम सुतार की कला ने भारत को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सहित कुछ सबसे मशहूर स्मारक दिए और उनके कामों को हमेशा भारत के इतिहास, संस्कृति और सामूहिक भावना की शक्तिशाली अभिव्यक्ति के रूप में सराहा जाएगा। मोदी ने कहा कि उनके काम कलाकारों और नागरिकों दोनों को प्रेरित करते रहेंगे।

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