भारत में जलवायु परिवर्तन का विकराल रूप: भारी बारिश ने लीं 17,500 जानें, खजाने पर भी पड़ी आपदा की मार!
भारत पिछले कुछ समय से अत्यधिक भारी बारिश का सामना कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस साल मानसून के कमजोर रहने का अनुमान लगाया गया था। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 'बेहद भारी बारिश' का मतलब है 24 घंटे में 21 सेंटीमीटर से ज्यादा वर्षा। 2017 से अब तक हर साल ऐसे 100 से अधिक मामले सामने आए हैं।
यही नहीं, साल 2024 में तो ऐसे 181 मामले दर्ज किए गए हैं। ये तीव्र बारिश तब भी हो रही है, जब पूरे मानसून सीजन में कुल बारिश सामान्य से अधिक नहीं हुई है। विशेषज्ञ इसके पीछे जलवायु परिवर्तन को ही एक बड़ी वजह बता रहे हैं।
भारी बारिश से आई बाढ़ ने लीं करीब 17,500 जानें
2012 से 2021 के बीच, इन भारी बारिश से आई बाढ़ ने लगभग 17,500 लोगों की जान ले ली है। इसका असर सिर्फ जान-माल के नुकसान पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2019-20 से 2023-24 के बीच आपदा प्रबंधन पर राज्यों ने जितना भी खर्च किया, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा बाढ़ से राहत और बचाव कार्यों पर ही खर्च हुआ। इन आंकड़ों से साफ है कि अगर हमें इस नई स्थिति से निपटना है, तो शहरों की बेहतर योजना और आपदा प्रबंधन की तैयारी पर और ज्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है।