भारत में 6.20 करोड़ टन CBG की अपार क्षमता, कचरा बटोरना है बड़ी चुनौती
इक्विर्स की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर साल 6.20 करोड़ मीट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाने की जबरदस्त क्षमता है। इस क्षमता को पूरा करने के लिए मुख्य तौर पर जैविक कचरे का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पूरी क्षमता में सबसे बड़ा हिस्सा जानवरों के कचरे से मिलेगा, जो अकेले ही कुल उत्पादन का 41 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही खेतों में बचे हुए फसल अवशेष और शहरों से निकलने वाला कचरा भी इस आंकड़े को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
भारत को जैविक कचरा इकट्ठा करने के बेहतर तरीके चाहिए
इस रिपोर्ट में कुछ असली चुनौतियाँ भी बताई गई हैं। गांवों में जानवरों का कचरा दूर-दूर तक फैला रहता है, जिसकी वजह से उसका बहुत कम हिस्सा ही इकट्ठा हो पाता है। इसके अलावा, फसल कटने के तुरंत बाद ही खेतों से अवशेष हटाना या इकट्ठा करना पड़ता है। शहरों में भी, खाने-पीने और गीले कचरे का लगभग आधा हिस्सा ही ऐसा होता है, जिसे सही मायनों में उपयोग में लाया जा सकता है। रिपोर्ट का सीधा मतलब यह है कि अगर भारत अपनी बायोगैस क्षमता का पूरा फायदा उठाना चाहता है और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है, तो उसे कचरा इकट्ठा करने और उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के बेहतर सिस्टम बनाने होंगे।