प्रेस की आजादी पर खतरा, दिमागी नक्सल कहने पर भाजपा पर बरसी एडिटर्स गिल्ड
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने भाजपा द्वारा पत्रकारों को 'दिमागी नक्सल' कहने की कड़ी निंदा की है। यह बयान तब सामने आया जब भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया पर 'बौद्धिक नक्सल' शब्द का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि ऐसे लोग हिंसा को बढ़ावा देते हैं और लोकतांत्रिक समाधानों को स्वीकार नहीं करते। गिल्ड ने वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई के खिलाफ उठाए गए कदमों पर भी आपत्ति जताई, जो गिल्ड के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। गिल्ड ने यह भी कहा कि भाजपा ने एक वीडियो में उन्हें निशाना बनाया था और ऐसे हमलों से प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाती है।
EGI ने भाजपा से बदनाम करना बंद करने का आग्रह किया
EGI ने भाजपा से पत्रकारों को बदनाम करना बंद करने की अपील की है। गिल्ड ने इस बात पर जोर दिया कि असहमति और पड़ताल लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। गिल्ड का यह बयान ऐसे समय आया है जब वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 157वें पायदान पर आ गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकारों पर हमले और मीडिया स्वामित्व का कुछ हाथों में केंद्रित होना इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं।