मानसून की देरी से खतरे में पड़ी खरीफ फसल, देशभर में 21 प्रतिशत कम हुई बुवाई
इस साल मानसून काफी देर से आया है, जिसकी वजह से खेती का पूरा मौसम बिगड़ गया है। 7 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 21 प्रतिशत कम हुई है। अब तक किसानों ने सिर्फ 3.5 करोड़ हेक्टेयर रकबे में ही बुवाई की है। बुवाई के सबसे अहम समय में बारिश की कमी ने कई राज्यों की खेती पर बुरा असर डाला है। चावल, दालें, तिलहन, कपास और मोटे अनाज जैसी मुख्य फसलों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
सरकार ने किसानों के लिए शुरू की राहत योजना की तैयारी
जून महीने में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है। 1901 के बाद से यह सबसे सूखे जून महीनों में से एक रहा है। अल नीनो की आशंका को देखते हुए आगे भी सूखे जैसी स्थिति बनी रह सकती है। खाद्य फसलों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है और अगर हालात में सुधार नहीं होता तो बाजार में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। सरकार इस स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है और उसने 12 राज्यों में वैकल्पिक योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं से किसानों को बारिश कम होने पर दूसरी फसलें बोने या पानी का बेहतर इंतजाम करने में सहायता मिलेगी।