भारत सरकार ने कोयले की कमी से निपटने के लिए आयात की योजना टाली
भारत ने कोयले के अनिवार्य आयात की अपनी योजना खत्म कर दी है। इसकी वजह है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले के आसमान छूते दाम और रुपये का कमजोर होना।
अब सारा ध्यान कोल इंडिया लिमिटेड पर है कि वह देश में ही कोयले का उत्पादन बढ़ाए ताकि बिजली घर लगातार चलते रहें।
यह बदलाव ऐसे मुश्किल समय में आया है जब देश में कोयले का भंडार पिछले करीब पांच सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे देश की बिजली आपूर्ति पर संकट गहरा सकता है।
भारत के बिजली घरों में कोयले की कमी
पहले सोचा गया था कि बाहर से मंगाए गए कोयले को देश में मिलने वाले कोयले के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन ज्यादा कीमत की वजह से ऐसा हो नहीं पाया।
देश के करीब आधे बिजली घरों में अब कोयले का भंडार बहुत कम रह गया है (जितना उन्हें चाहिए, उसका 25 प्रतिशत से भी कम)।
सितंबर में पिछले लगभग दस सालों की सबसे खराब बिजली कटौती हुई थी। इसकी वजह थी बिजली की भारी मांग और खराब मॉनसून के कारण पनबिजली (हाइड्रोपावर) का कम उत्पादन। हालांकि, आने वाले समय में मौसम ठंडा होने से थोड़ी राहत मिल सकती है।