मानसून और बढ़ी मांग से गहराया बिजली संकट, 45 पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक 19 प्रतिशत घटा
देशभर के 45 पावर प्लांट कोयले की कमी का सामना कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि तेज मानसूनी बारिश के कारण खदानों से कोयले की ढुलाई बाधित हुई है। ठीक इसी समय बिजली की मांग में भी भारी उछाल आया है।
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के आंकड़ों के मुताबिक, इन प्रभावित प्लांट्स में से 40 घरेलू कोयले से चलने वाले संयंत्र हैं। यह संख्या पिछले महीने के मुकाबले काफी ज्यादा है।
जुलाई के अंत से कोयले के भंडार में 19 प्रतिशत की गिरावट
ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में हुई भारी बारिश ने न सिर्फ कोयला खनन को प्रभावित किया है, बल्कि पावर प्लांट्स तक ईंधन पहुंचाने की रफ्तार भी धीमी कर दी है।
इसके साथ ही, अल नीनो के प्रभाव से कमजोर मानसून ने बिजली की बढ़ती जरूरतों को पूरा करना मुश्किल बना दिया है, खासकर रात के समय जब लोगों को ठंडक के लिए ज्यादा बिजली चाहिए होती है। जुलाई के अंत के बाद से कोयले का भंडार 19 प्रतिशत घट गया है। बिजली की आपूर्ति बनी रहे, इसके लिए बिजली मंत्रालय ने कुछ प्लांट्स को निर्देश दिए हैं कि वे सप्लाई की स्थिति स्पष्ट होने तक रखरखाव का काम टाल दें। यह स्थिति दर्शाती है कि भारत के ऊर्जा सिस्टम के लिए मौसम के अप्रत्याशित बदलावों से निपटना कितना ज़रूरी है, साथ ही बढ़ती बिजली की मांग को भी पूरा करना एक बड़ी चुनौती है।