महाराष्ट्र में सूखे का महासंकट: फसलें तबाह, पशुओं को नहीं मिल रहा चारा
महाराष्ट्र इस समय एक गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। भयंकर सूखे के कारण राज्य में जानवरों के चारे की भारी कमी हो गई है, जिससे लगभग 2.78 करोड़ पशुधन प्रभावित हुए हैं।
चारे की जितनी जरूरत है और जितना उपलब्ध है, उसमें बहुत बड़ा अंतर आ गया है। हरे चारे में 22.79 प्रतिशत और सूखे चारे में 21.43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। साफ शब्दों में कहें तो, सभी जानवरों के लिए पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा है।
सोलापुर में आधी बारिश हुई, खेती और मत्स्य पालन भी मुश्किल में
केवल जानवर ही इस गर्मी की मार नहीं झेल रहे, बल्कि किसानों के लिए भी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
सोलापुर जिले में इस साल सामान्य से आधी ही बारिश हुई है। इस कम बारिश के कारण खरीफ फसलें पूरी तरह चौपट हो गईं और लगभग 90,000 हेक्टेयर सोयाबीन बर्बाद हो गया।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात 1972 के सूखे से भी ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने किसानों को पानी की सुरक्षा देने और राहत पहुंचाने का वादा भी किया है। इन सब चुनौतियों के अलावा, जलस्तर घटने से मत्स्य पालन पर भी गहरा असर पड़ रहा है।
सरकार का कहना है कि वह इन मुश्किलों से निपटने के लिए सर्वे करवा रही है और जल संरक्षण प्रोजेक्टों पर तेजी से काम कर रही है।