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तीसरी भाषा को 9वीं कक्षा से लागू करना ठीक नहीं- भाषा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट
तीन भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है

तीसरी भाषा को 9वीं कक्षा से लागू करना ठीक नहीं- भाषा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट

लेखन आबिद खान
Jul 16, 2026
02:23 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम के तहत कक्षा 9वीं से तीसरी भाषा को शामिल करने पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि इससे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर अनावश्यक दबाव पड़ेगा। ये टिप्पणियां मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की अपील की सुनवाई के दौरान आईं, जिसमें राज्य को हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालयों खोलने की सुविधा देने को कहा गया था।

टिप्पणी

कोर्ट ने कहा- 9वीं कक्षा तनावपूर्ण होती है

जस्टिस बीवी नागरत्ना ने तीसरी भाषा को शुरू करने के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों को इसे बहुत पहले सीखना शुरू कर देना चाहिए।

उन्होंने कहा, "9वीं कक्षा तनावपूर्ण होती है। 9वीं कक्षा में नई भाषा क्यों पढ़ाई जाती है? इसे छठी कक्षा में पढ़ाया जाता है। भारत सरकार, कृपया 9वीं कक्षा में तीसरी भाषा न रखें। CBSE, ICSE, राज्य बोर्ड, 10वीं कक्षा एक बोर्ड परीक्षा है। 8वीं कक्षा से ही दबाव शुरू हो जाता है।"

हिंदी

जस्टिस ने कहा- हिंदी तीसरी भाषा के तौर पर जरूरी नहीं

तमिलनाडु के वकील ने कहा कि राज्य की आपत्ति तीन-भाषा नीति से जुड़ी है।

इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा, "राज्य की भाषा सिखानी है, अंग्रेजी सिखानी है और कोई तीसरी भाषा भी। इसमें हिंदी का जिक्र नहीं है।"

इस पर प्रतिवादी के वकील ने कहा, "राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कहा गया है कि राज्य पर कोई भाषा थोपी नहीं जानी चाहिए।"

इसके बाद जस्टिस नागरत्ना ने पूछा, "आप हिंदी नहीं चाहते लेकिन अगर संस्कृत हो तो क्या समस्या है?"

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बयान

जस्टिस ने याद किया अपना स्कूली शिक्षा का अनुभव

जस्टिस नागरत्ना ने कहा, "माध्यमिक विद्यालय में तीसरी भाषा इसलिए शुरू की गई क्योंकि यह माध्यमिक परीक्षा के लिए जरूरी थी। जिन छात्रों की दूसरी भाषा हिंदी थी, उनके लिए कन्नड़ और संस्कृत भी थी। जितनी जल्दी हो, उतना अच्छा। तो अगर हमारे पास उस तरह की तैयारी थी, तो आज के छात्रों का क्या? 9वीं कक्षा में नई भाषा शुरू मत करो। छठी कक्षा में शुरू करो। मुझे 1976 का अपना अनुभव याद आ रहा है।"

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नीति

क्या है तीन भाषा नीति?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में तीन भाषा नीति का प्रावधान किया गया है। इसके तहत, छात्रों को 3 भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम 2 भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए और तीसरी कोई अंतरराष्ट्रीय भाषा हो सकती है।

पहली भाषा छात्र की मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा होगी। दूसरी भाषा आमतौर पर हिंदी होगी या राज्य की कोई दूसरी भारतीय भाषा होगी।

वहीं, तीसरी भाषा अंग्रेजी या अन्य कोई विदेशी भाषा हो सकती है।

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