डीजल संकट: हाइवे पर थमे पहिए, सरकारी कंपनियों को रोज 10 अरब का बड़ा झटका
भारत के हाईवे पर इन दिनों ट्रक और उनके ड्राइवरों की मुसीबत बढ़ गई है। इसकी मुख्य वजह है डीजल की कमी। निजी कंपनियों के पेट्रोल पंप, जैसे नयरा एनर्जी और शेल, डीजल की बिक्री या तो घटा रहे हैं या फिर उसके दाम बढ़ा रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। नतीजा यह कि कुछ ट्रक ड्राइवरों को घंटों तक ईंधन के लिए भटकना पड़ रहा है, जबकि कईयों को तो टैंक खाली होने पर अपना रास्ता बीच में ही छोड़ना पड़ रहा है।
सरकारी रिफाइनरी को रोजाना 10 अरब रुपये का नुकसान
जब निजी पंपों पर डीजल महंगा हुआ, तो लोगों ने सरकारी पंपों का रुख किया। यहां डीजल सस्ता होने के कारण लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। मगर, सरकारी रिफाइनरियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। वे हर दिन लगभग 10 अरब रुपये का घाटा झेल रही हैं, क्योंकि वे डीजल को उसकी लागत से भी कम दाम पर बेच रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने के बावजूद, ये नुकसान कम नहीं हो रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतें और रुपये का कमजोर होना उनके लिए और मुश्किलें पैदा कर रहा है।