महात्मा गांधी को 5 बार नामित होने के बावजूद क्यों नहीं मिला नोबेल शांति पुरस्कार?
क्या है खबर?
महात्मा गांधी की आज जयंती है। वे 20वीं सदी में अहिंसा और शांति के सबसे बड़े प्रतीक माने जाते हैं। उनकी सत्याग्रह की विचारधारा का असर न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया पर है। सवाल उठते रहे हैं कि अंहिसा के प्रवर्तक होने के बावजूद गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार क्यों नहीं दिया गया। उन्हें 5 बार पुरस्कार के लिए नामित किया गया था, लेकिन कभी मिला नहीं। आइए इससे जुड़े घटनाक्रम जानते हैं।
नामित
पुरस्कार के लिए गांधी जी को कब-कब किया गया नामित?
गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 5 बार नामांकित किया गया था- 1937, 1938, 1939, 1947 और 1948 में।
बाद में नोबेल समिति के सदस्यों ने सार्वजनिक रूप से उन्हें पुरस्कार न दिए जाने पर खेद व्यक्त किया था।
1989 में जब दलाई लामा को नोबेल शांति पुरस्कार मिला, तब समिति के अध्यक्ष ने कहा था कि यह पुरस्कार "कुछ हद तक महात्मा गांधी की स्मृति को श्रद्धांजलि" है।
पहला नामांकन
पहली बार नामांकन के बाद क्यों नहीं मिला पुरस्कार?
गांधी को पहली बार 1937 में नॉर्वे की संसद में लेबर पार्टी के सदस्य ओले कोल्बजोर्नसेन ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था।
तब नोबेल समिति के एक सलाहकार जैकब वारमुलर ने अपनी टिप्पणी में लिखा था, "वह अहिंसा की अपनी नीति पर हमेशा कायम नहीं रहे और उन्हें इन बातों की कभी परवाह नहीं रही कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनका अहिंसक प्रदर्शन कभी भी हिंसक रूप ले सकता है।"
दूसरा नामांकन
1938 और 1939 में क्यों नहीं मिला गांधी को पुरस्कार?
कोल्बजोर्नसेन ने 1938 और 1939 में गांधी को फिर से पुरस्कार के लिए नामांकित किया। फिर भी उन्हें पुरस्कार नहीं मिला।
इसकी एक वजह ये भी माना जाती है कि तब नोबेल समिति का नजरिया कुछ हद तक संकीर्ण और पारंपरिक था। तब नोबेल शांति पुरस्कार मुख्य रूप से यूरोपीय और अमेरिकी लोगों को दिए जाते थे। गांधी जी इस खांचे में फिट नहीं बैठते थे।
ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई को भी इसकी वजह माना जाता है।
1947
1947 में क्या हुआ था?
1947 में गांधी समेत शांति पुरस्कारों के लिए केवल 6 लोगों का नामांकन हुआ था। तब भारत-पाकिस्तान के बीच भड़के सांप्रदायिक दंगों और तनावपूर्ण स्थिति के कारण समिति संकोच में पड़ गई। समिति के 5 में से 3 सदस्य गांधी जी को पुरस्कार देने के पक्ष में नहीं थे।
इस दौरान विभाजन के बाद अखबारों में छपे गांधी के कुछ कथित विवादास्पद बयानों का भी जिक्र हुआ।
उस साल ये पुरस्कार मानवाधिकार आंदोलन क्वेकर को दिया गया।
आखिरी नामांकन
1948 में गांधी को क्यों नहीं मिला नोबेल?
1948 में क्वेकर ने गांधी को पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया। नामांकन की समयसीमा खत्म होने से 2 दिन पहले गांधी की हत्या हो गई। तब तक नोबेल समिति को गांधी के पक्ष में 5 प्रस्ताव मिल चुके थे।
हालांकि, उस समय मरणोपरांत किसी को नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाता था। इसके अलावा गांधी का कोई संगठन या ट्रस्ट नहीं था, जिसके चलते ये समस्या थी कि राशि किसे दी जाए।
1948 में किसी को भी पुरस्कार नहीं दिया गया।