दिल्ली में AI निगरानी का जाल: 1,789 करोड़ रुपये के कैमरे, निजता पर बड़ा सवाल
दिल्ली को 1,789.52 करोड़ रुपये की एक योजना के तहत 2,500 AI-पावर्ड कैमरे मिल रहे हैं। इन कैमरों का मकसद ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वालों को पकड़ना और संदिग्ध गाड़ियों का पता लगाना है।
लेकिन, इन कैमरों से मिलने वाले डेटा को कैसे संभाला जाएगा, इस बारे में कोई साफ नियम न होने की वजह से निजता को लेकर कई लोग चिंतित हैं।
IFF और कार्यकर्ता चाहते हैं पारदर्शी नियम
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) जैसे संगठनों का मानना है कि इस फुटेज को कौन एक्सेस करेगा या कौन इसे स्टोर कर पाएगा, इसके लिए अगर ठोस नियम नहीं बने, तो यह पूरा सिस्टम एक बड़े निगरानी तंत्र में बदल जाएगा।
डिजिटल राइट्स लीगल ग्रुप SFLC.in की संस्थापक मिशी चौधरी ने साफ शब्दों में कहा, "टेक्नोलॉजी को सड़क सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होना चाहिए, न कि लोगों की निजता में सेंध लगाने के लिए।"
कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि इस प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले ही पारदर्शी नियम बनाए जाएँ। यह प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद इसे पूरा होने में 24 महीने लगेंगे। इसे अक्टूबर 2026 के 8 महीनों के भीतर शुरू होना है, जिसका मतलब है कि अगर यह उस तय समय के आखिर में शुरू होता है, तो 2029 के मध्य तक भी पूरा हो सकता है।