CJP प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का खुलासा, कहा- सोशल मीडिया का किया गया गलत इस्तेमाल
क्या है खबर?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दबाव में आकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही अफवाहों और भ्रामक पोस्ट को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बड़ी संख्या में गलत सूचनाएं फैलाने के लिए किया गया।
पहचान
पुलिस ने की 400 हैंडल की पहचान
सेंट्रल दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) रोहित राजबीर सिंह ने कहा कि इन सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो का मकसद लोगों के बीच भ्रम, डर और अस्थिरता का माहौल पैदा करना था।
उन्होंने बताया कि जांच में अब तक 400 से अधिक ऐसे सोशल मीडिया हैंडल की पहचान की गई है, जो प्रदर्शन से जुड़ी भ्रामक और तथ्यहीन सामग्री प्रसारित कर रहे थे।
इसके अलावा पाकिस्तान से संचालित 480 सोशल मीडिया हैंडल को भी चिन्हित कर ब्लॉक किया गया है।
दावा
प्रदर्शन में नहीं हुई किसी की मौत - DCP
DCP सिंह ने बताया कि इन विदेशी हैंडल से लगातार ऐसी सामग्री साझा की जा रही थी, जिससे दिल्ली की कानून-व्यवस्था खराब हो और लोगों का गुस्सा बढ़े।
उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया गया था कि 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान घायल हुई एक महिला प्रदर्शनकारी की मौत हो गई है। हालांकि, जांच में यह दावा पूरी तरह गलत पाया गया। संबंधित महिला अस्पताल में भर्ती थी और उसकी मृत्यु नहीं हुई थी।
खंडन
पुलिस ने फर्जी दावों का किया खंडन
DCP सिंह ने एक अन्य उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि दिल्ली पुलिस रात के समय प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने वाली है।
इस संबंध में एक प्रमुख राजनीतिक नेता की सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र किया गया।
पुलिस ने साफ कहा कि ऐसा कोई अभियान न तो प्रस्तावित था और न ही उसकी कोई योजना बनाई गई थी। यह सब छात्रों को भड़काने की एक साजिश मात्र थी।
सफाई
पुलिस ने सोनम वांगचुक मामले में भी दी सफाई
DCP सिंह ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक का एक डीपफेक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। इसके अलावा राजधानी में सेना की तैनाती को लेकर भी कई फर्जी वीडियो और पोस्ट प्रसारित किए गए, जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं हुआ था।
उन्होंने कहा कि इन वीडियो को तकनीकी रूप से एडिट कर इस तरह प्रस्तुत किया गया कि लोग उन्हें वास्तविक माने। डीपफेक और मॉर्फ्ड सामग्री कानून-व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन गई है।