दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए AI की मदद, बनाए गए कंट्रोल सेंटर
दिल्ली सर्दियों के स्मॉग से मुकाबले के लिए अब नई तकनीक का सहारा ले रही है। शहर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंट्रोल सेंटर और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जा रहे हैं।
इसके साथ ही, जमीनी स्तर पर भी कड़ी जांच की जा रही है, जिससे हवा को प्रदूषित करने वाली चीजों पर बेहतर तरीके से नजर रखी जा सके।
दिल्ली प्रदूषण के मुख्य स्रोतों पर लगाम लगाने की तैयारी में
पेट्रोल पंपों पर लगे ANPR कैमरों को सीधे परिवहन विभाग के सर्वर से जोड़ा गया है। ये कैमरे ऐसे वाहनों की पहचान करते हैं, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) नहीं है या जो निर्धारित आयु सीमा से अधिक पुराने हैं। नियमों का उल्लंघन पकड़े जाने पर पहले से रिकॉर्ड किया गया ऑडियो सिस्टम पेट्रोल पंप कर्मचारियों को अलर्ट करता है, ताकि वे 'PUCC नहीं तो ईंधन नहीं' प्रतिबंध लागू कर सकें।
500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले 700 से ज्यादा बड़े निर्माण स्थलों पर AI-सक्षम CCTV नेटवर्क के जरिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। ये AI सिस्टम वास्तविक समय में PM10 (पार्टिकुलेट मैटर) के स्तर में अचानक बढ़ोतरी को ट्रैक करते हैं। स्तर बढ़ने पर निर्माण स्थल के प्रबंधकों और स्थानीय पर्यावरण अधिकारियों को स्वतः SMS अलर्ट भेजे जाते हैं, ताकि धूल नियंत्रण के लिए तत्काल उपाय किए जा सकें।
इस योजना का मुख्य फोकस सड़क की धूल, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल जैसे प्रमुख प्रदूषकों पर है।
दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में जहां लगातार गतिविधियां चलती रहती हैं, यह काम बेशक चुनौती भरा है। इसके बावजूद, शहर ने कड़े नियमों के जरिए साफ हवा के लिए लगातार प्रयास किए हैं।
इन कदमों का लक्ष्य है कि दिल्ली के हर नागरिक को थोड़ी राहत मिल सके और हर कोई आसानी से सांस ले पाए।