दिल्ली जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन: प्रदर्शनकारियों पर दर्ज हुई FIR कैसे होगी वापस? जानिए पूरी प्रक्रिया
क्या है खबर?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में NEET-UG पेपर लीक के विरोध में 36 दिनों का दिल्ली के जंतर-मंतर पर चला विरोध प्रदर्शन सरकार के मांगे मानने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने का आश्वासन देने के बाद समाप्त हो गया। हालांकि, अब यह सवाल उठ रहा है कि सरकार इन मामलों को किस तरह वापस लेगी और क्या सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे। ऐसे में आइए दर्ज हुए मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया जानते हैं।
कार्रवाई
पुलिस ने मामले में कितनी FIR दर्ज की है?
13 जून से 25 जुलाई चले इस विरोध प्रदर्शन दौरान दिल्ली पुलिस ने 15-20 FIR दर्ज होने का दावा किया है।
इनमें हिंसक झड़प, पथराव, राजकार्य में बाधा, पुलिसकर्मियों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप शामिल हैं।
इसको लेकर संसद मार्ग थाना पुलिस ने 4, कनॉट प्लेस ने 3, मंदिर मार्ग, कर्तव्य पथ और बाराखंबा रोड थाना पुलिस ने एक-एक FIR दर्ज की है।
शेष FIR ड्रोन उड़ाने और पत्रकारों पर हमले की है।
प्रक्रिया
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR वापस लेने की प्रक्रिया क्या है?
दिल्ली में सरकार के आश्वासन के बाद सबसे पहले गृह विभाग सभी FIR की सूची और फाइल तैयार करेगा।
इसके बाद गृह सचिव, कानून सचिव और दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधियों वाली विशेष समिति मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की सिफारिश करेगी।
इसके बाद गृह विभाग समिति की सिफारिश वाली फाइल अंतिम मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास भेजी जाएगी।
उपराज्यपाल की लिखित स्वीकृति मिलने के बाद सरकार FIR वापस लेने का आदेश जारी करेगी।
निर्देश
उपनिदेशक अभियोजन को निर्देश
उपराज्यपाल की मंजूरी मिलते ही गृह विभाग दिल्ली पुलिस के अभियोजन निदेशालय के उपनिदेशक को संबंधित अदालतों में मामले वापस लेने के लिए आवेदन करने का लिखित दिशा-निर्देश जारी करता है।
संबंधित कोर्ट के सरकारी वकील नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 360 (जो पहले CrPC की धारा 321 थी) के तहत संबंधित न्यायालय के मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज FIR की वापसी की औपचारिक अर्जी लगाते हैं और कहते हैं कि उन्हें आगे कार्रवाई नहीं करनी है।
मुहर
कोर्ट लगाती है FIR वापसी पर अंतिम मुहर
कोर्ट में आवेदन के बाद FIR को रद्द या वापस करने का अंतिम फैसला अदालत के आदेश पर ही निर्भर करता है।
अगर, जज संतुष्ट होते हैं कि केस वापस लेना न्यायसंगत और जनहित में है, तो वे अर्जी स्वीकार कर लेते हैं।
इसके बाद प्रदर्शनकारियों के नाम FIR से कानूनी रूप से हटा दिए जाते हैं और केस बंद हो जाता है।
हालांकि, इस मामले में पत्रकारों की ओर से दर्ज कराई गई FIR वापस नहीं होगी।
इनकार
कोर्ट के FIR रद्द करने से इनकार करने पर क्या होगा?
कई बार गंभीर सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान या हिंसा के मामलों में कोर्ट सरकार की अर्जी को खारिज कर देती है। ऐसे में FIR रद्द नहीं होती है और मामले का सामान्य कानूनी ट्रायल चलता है।
हालांकि, इस स्थिति में सरकार या आरोपी प्रदर्शनकारी ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर कर सकते हैं और ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दे सकते हैं।
इसके बाद हाई कोर्ट FIR को रद्द कर सकता है।
विकल्प
अन्य विकल्प क्या है?
प्रदर्शनकारी BNSS की धारा 528 (जो पहले CrPC की धारा 482 थी) के तहत भी सीधे हाई कोर्ट में FIR रद्द करने की याचिका लगा सकते हैं।
इसमें दलील दी जाती है कि यह FIR राजनीति से प्रेरित है और इसे जारी रखना उनके अधिकारों का हनन है।
धारा 528 के तहत हाई कोर्ट को यह विशेषाधिकार दिए गए हैं कि वह राजनीति से प्रेरित या फर्जी FIR को एक ही झटके में पूरी तरह रद्द कर सकता है।
चेतावनी
CJP ने सरकार को दी दोबारा आंदोलन करने की चेतावनी
CJP ने सरकार के आश्वासन के बाद आंदोलन को स्थगित तो किया है, लेकिन विभिन्न राज्यों में जारी कार्रवाई पर नाराजगी जताई है।
CJP ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने वादे के मुताबिक प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी FIR को वापस लेने की अदालती प्रक्रिया 28 जुलाई तक शुरू नहीं करती है तो उन्हें एक बार फिर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन महाआंदोलन के लिए लामबंद होना पड़ेगा। इसके बाद पूरे घटनाक्रम की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।