दिल्ली फायर सर्विस का कायापलट, दूर हुई 1969 की जानलेवा खामियां
दिल्ली फायर सर्विस की संचार व्यवस्था साल 1969 से ही काम कर रही है। यह सिस्टम सिर्फ 17 फायर स्टेशनों के लिए बनाया गया था, लेकिन आज इसका इस्तेमाल 71 स्टेशनों पर हो रहा है। इस पुरानी व्यवस्था के चलते ऊंची इमारतों और भूमिगत जगहों पर सिग्नल कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में आपात स्थितियों के दौरान दमकलकर्मियों को आपस में तालमेल बिठाने में काफी मुश्किल आती है। सरकार की एक हालिया समीक्षा में इन कमियों को उजागर किया गया है।
दिल्ली सरकार GPS-GIS जैसे नए तकनीकी समाधान कर रही लागू
इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए दिल्ली सरकार दमकल सेवा में नई टेक्नोलॉजी ला रही है। इसमें GPS ट्रैकिंग, GIS मैपिंग और आधुनिक डिस्पैच सिस्टम शामिल हैं। गृह मंत्री आशीष सूद ने बताया कि ये सुधार बेहद जरूरी हैं, क्योंकि साल 2025-26 में आग लगने की घटनाओं में 84 लोगों की जान चली गई थी। इस योजना का एक और लक्ष्य ट्रैफिक के कारण होने वाली देरी और पुराने उपकरणों की वजह से आने वाली दिक्कतों को दूर करना भी है, ताकि बढ़ती दिल्ली में दमकलकर्मी और तेजी से लोगों तक पहुंच सकें।