दिल्ली AIIMS में ऑपरेशन के लिए 13 साल इंतजार करती रही बच्ची, आखिर में दम तोड़ा
क्या है खबर?
देश की राजधानी दिल्ली में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में लाचार व्यवस्था, लापरवाही और बदइंतजामी ने एक 15 साल की बच्ची की जान ले ली। राजस्थान में कोटा निवासी तन्वी 2 साल की उम्र से दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। उसके माता-पिता ने 2012 में AIIMS में उसका इलाज शुरू किया, लेकिन 2026 तक उसका ऑपरेशन नहीं हो सका। छात्रा ने 15 साल बीमारी के साथ जीते हुए मंगलवार को दिल्ली में दम तोड़ दिया।
घटना
2012 में 2 साल की उम्र में AIIMS की OPD लाए थे अभिभावक
तन्वी के पिता मुकेश परियानी ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि वह पहली बार 10 अक्टूबर, 2012 को तन्वी को AIIMS की बाह्य रोगी विभाग (OPD) लाए थे।
यहां डॉ कोठारी ने शुरूआती जांच लिखी, जिसमें एक साल का समय लग गया। जांच रिपोर्ट के बाद उनको डॉ सचिन तलवार के पास भेजा गया।
डॉ तलवार ने उनको ऑपरेशन का भरोसा दिलाकर पैसा जमा कराने को कहा, जिसपर परियानी ने अप्रैल 2014 को खून और पैसा जमा करा दिया।
शिकायत
लगातार टलता रहा ऑपरेशन
परियानी ने बताया कि उनकी बेटी को ऑपरेशन के लिए 2 सितंबर 2015 की तारीख दी गई, लेकिन जब उस दिन ऑपरेशन के लिए गए, तो दिवाली के बाद बुलाया गया।
इसके बाद 16 दिसंबर 2015 को भर्ती किया, लेकिन दांत में कीड़े बताकर ऑपरेशन टाल दिया। जनवरी 2016 में बुलाया गया, लेकिन उसके बाद भी ऑपरेशन टालते रहे।
बच्ची को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट यानी दिल में छेद और पल्मोनरी एट्रेसिया यानी फेफड़े तक रक्त न पहुंचने की शिकायत थी।
शिकायत
PMO में शिकायत के बाद बुलाया, लेकिन ऑपरेशन नहीं हुआ
तन्वी के पिता ने बताया कि उन्होंने थक हारकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत दी, जिसके बाद उन्हें बुलाया तो गया, लेकिन शिकायत वापस लेने का दबाव बनाकर ऑपरेशन नहीं किया।
इसके बाद 2018 में डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की फेफड़े की बस लगभग खराब हो चुकी है, अब दिल और फेफड़े का प्रत्यारोपण हो सकता है।
इसके बाद कोरोना के कारण परियानी घर पर रहे। 2023 में AIIMS पहुंचे तो जांच के बाद भी कोई ऑपरेशन नहीं हुआ।
परेशान
अगस्त 2026 में किया भर्ती
परियानी ने बताया कि उन्होंने लगातार 3 से 4 बार PMO में शिकायत की। हर बार उन्हें बुलाया गया, लेकिन इलाज के नाम पर कुछ नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि इस साल भी केवल जांच हुई, इलाज नहीं हुआ। अगस्त 2026 में उनकी बेटी को भर्ती किया गया। उसकी जांच हुई, लेकिन 1 सितंबर को उसकी मौत हो गई।
परियानी ने कहा कि अगर बच्ची का ऑपरेशन 2017 तक हो जाता, तो उनकी बेटी बच सकती थी।
ट्विटर पोस्ट
कोटा के परियानी ने बताई अपनी आपबीती
2014 में एक पिता ने अपनी बेटी के ऑपरेशन के लिए AIIMS में पैसे और खून जमा कराया था। उसे भरोसा था कि अब उसकी बेटी ठीक हो जाएगी लेकिन 12 साल तक अस्पताल के चक्कर लगाने के बाद सर्जरी नहीं हुई और उसकी बेटी की 2026 में अभी मौत हो गई।
— Hemant Rajaura (@hemantrajora_) September 2, 2026
12 साल तक तारीखें मिलती रहीं, जांचें होती रहीं,…