मुंबई में बढ़ रहे कोरोना वायरस और स्वाइन फ्लू के मामले, क्या मानसून है जिम्मेदार?
क्या है खबर?
मुंबई में एक साथ 4 तरह के संक्रमण से प्रभावित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। कोरोना वायरस, H1N1 (स्वाइन फ्लू), इन्फ्लूएंजा A और रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) से संक्रमित मरीज लगातार अस्पताल पहुंच रहे हैं। प्रमुख अस्पतालों में तेज बुखार और श्वसन तंत्र में गंभीर तकलीफ वाले मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि लगभग एक महीने तक H1N1 के मामले ज्यादा आए, लेकिन एक हफ्ते से कोरोनावायरस के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट
रोजाना कोरोनावायरस के करीब 7 मामले सामने आ रहे
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, ब्रीच कैंडी अस्पताल जैसे प्रमुख अस्पतालों में रोजाना कोरोना वायरस या H1N1 के 7 से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस (आमतौर पर पेट फ्लू) के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इन वायरसों के लक्षण काफी एक जैसे हैं। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि मरीज किस वायरस से संक्रमित है।
मानसून
क्या मानसून में देरी के चलते फैल रहा संक्रमण?
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर दक्ष शाह का कहना है कि संक्रमण में बढ़ोतरी के पीछे मानसून की धीमी रफ्तार वजह है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में देरी के कारण वातावरण में नमी का स्तर ज्यादा है। साथ ही हवा का प्रवाह भी कम है।ऐसी स्थिति में वायरस ज्यादा समय तक वातावरण में बने रहते हैं और संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। अधिकारियों का मानना है कि जब बारिश होगी तो संक्रमण कम हो सकता है।
विशेषज्ञ
किसे है खतरा?
कोरोना वायरस का मौजूदा संक्रमण ज्यादातर लोगों के लिए हल्का साबित हो रहा है। हालांकि, वरिष्ठ रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों को जटिलताओं का अधिक खतरा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर एक व्यक्ति एक साथ या एक के बाद एक कई वायरल संक्रमणों की चपेट में आता है तो फेफड़ों की क्षमता प्रभावित हो सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
सलाह
डॉक्टरों ने दी ये सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेने से बचने की सलाह दी है। भीड़भाड़ वाले इलाकों, लोकल ट्रेनों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें। हाथों की सफाई और खांसते या छींकते समय सावधानी बरतें। अगर लक्षण गंभीर हैं और लंबे समय तक बने रहते हैं तो डॉक्टर की सलाह पर जांच करानी चाहिए। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, भ्रम की स्थिति या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।