CJP ने 70 दिन में सरकार को झुकाया, जानिए NEET पेपर लीक मामले की पूरी कहानी
क्या है खबर?
3 मई को जब NEET-UG परीक्षा पेपर लीक हुआ था तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह मामला देश की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल बन जाएगा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ेगा। हालांकि, ऐसा हुआ और इसमें सबसे बड़ा योगदान 70 दिन पहले सामने आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का रहा। उसने देश के युवाओं को एकजुट किया और सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। आइए पूरे घटनाक्रम पर नजर डालते हैं।
शुरुआत
कैसे हुई थी इस विवाद की शुरुआत?
इस विवाद की शुरुआत मई 2026 में हुई थी। 3 मई को NEET-UG परीक्षा आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 22 लाख छात्र शामिल हुए थे।
इसके कुछ दिन बाद 7 मई को शिकायतें आई कि गेस पेपर के नाम पर असली सवाल पहले ही लीक हो चुके थे।
इन शिकायतों के बाद हड़कंप मच गया और 12 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी और मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी।
स्वीकार
शिक्षा मंत्री ने स्वीकार की पेपर लीक की बात
15 मई को खुद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि 'कमांड चेन' की चूक से पेपर लीक हुआ था।
उसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा का ऐलान किया गया। इसके लिए सरकार के समग्र दृष्टिकोण के तहत काम करना तय किया गया। इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के साथ राज्यों का भी सहयोग लिया गया।
उस दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि अगले वर्ष से परीक्षा कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी।
टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी ने दिया CJP को जन्म
15 मई को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक टिप्पणी वायरल हो गई, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं के लिए 'कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल किया था।
इसी टिप्पणी से प्रेरित होकर 16 मई को अभिजीत दिपके नाम के युवक ने मजाकिया अंदाज में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम का एक संगठन बना दिया।
हालांकि, कुछ ही दिन में देश के लाखों युवा CJP से जुड़ गए और उन्होंने NEET पेपर लीक का मामला उठा लिया।
प्रदर्शन
CJP ने 6 जून को जंतर-मंतर पर किया पहला प्रदर्शन
6 जून को CJP ने जंतर-मंतर पर पहला बड़ा प्रदर्शन कर शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा सुधार और मृत छात्रों के परिवारों को मुआवजे की मांग रख दी।
20 जून से यह प्रदर्शन और गंभीर हो गया, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में आ गए और भूख हड़ताल पर बैठ गए, यह भूख हड़ताल करीब 26 दिन तक चली।
परीक्षा
NEET-UG दोबारा परीक्षा होने और परिणाम आने के बाद भी शांत नहीं हुआ मामला
21 जून को विरोध के बीच NEET-UG की दोबारा परीक्षा आयोजित की गई और नतीजे भी जल्द घोषित हुए, लेकिन छात्रों का गुस्सा और आंदोलन शांत नहीं हुआ।
जुलाई का महीना इस पूरे विवाद का सबसे तनावपूर्ण दौर साबित हुआ।
20 जुलाई को CJP ने 'संसद मार्च' निकाला। पुलिस की अनुमति न होने पर उन्हें रोका गया, जिससे तनाव बढ़ गया।
पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। उसके बाद आंदोलन और उग्र हो गया।
समर्थन
विपक्ष ने किया CJP का समर्थन, प्रधानमंत्री आवास का किया घेराव
इस मामले में 20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र पूरी तरह ठप हो गया। विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा में कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
इसके बाद 21-22 जुलाई को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्ष ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करन धरना दिया।
इस पर पुलिस ने राहुल और प्रियंका समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने जारी किया वीडियो संदेश
23-24 जुलाई की रात को प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने, ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और सख्त सजा के लिए नया विधेयक पारित करने का भरोसा दिलाया।
24 जुलाई को कैबिनेट ने पेपर लीक रोधी विधेयक को मंजूरी दे दी।
सरकार ने CJP की 2 मांगों (मुआवजा और केस वापसी) पर सहमति जता दी, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर समय मांग लिया।
इस्तीफा
शिक्षा मंत्री ने CJP के साथ सरकार की बैठक से पहले दिया इस्तीफा
इस मामले में सरकार ने 25 जुलाई की दोपहर में CJP प्रतिनिधिमंडल के साथ दूसरे चरण की वार्ता तय की थी, लेकिन उससे करीब 2 घंटे पहले शिक्षा मंत्री प्रधान ने अपने इस्तीफे के ऐलान कर दिया।
उन्होंने यह इस्तीफा प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा। ऐसे में CJP ने अपने गठन के महज 70 दिन में सरकार को अपने मांगों के आगे झुका दिया।
हालांकि, प्रधान के इस्तीफे के बाद भी CJP का प्रदर्शन अभी भी जारी है।