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प्रल्हाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का जिम्मा, सामने होंगी क्या-क्या चुनौतियां?
प्रल्हाद जोशी ने शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल ली है

प्रल्हाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का जिम्मा, सामने होंगी क्या-क्या चुनौतियां?

लेखन आबिद खान
Jul 26, 2026
05:53 pm

क्या है खबर?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। आज उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी संभाल भी ली है। उन्होंने यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे 'विनम्रता और कर्तव्य की गहरी भावना' के साथ इस भूमिका को स्वीकार कर रहे हैं। NEET पेपर लीक और तमाम विवादों के चलते जोशी की ये भूमिका कितनी चुनौतीपूर्ण रहने वाली है, समझते हैं।

विश्वास

परीक्षाओं में विश्वास बहाल करना पहली प्राथमिकता

जोशी के सामने सबसे बड़ी तात्कालिक चुनौती राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में युवाओं का विश्वास बहाल करने की होगी। उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और पूर्ण निष्पक्षता को लेकर लाखों चिंतित उम्मीदवारों को आश्वस्त करना होगा।

साथ ही हालिया राष्ट्रव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों से पैदा हुए राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों को संभालना होगा। उन्हें परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित, निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

NTA

NTA में करने होंगे बड़े बदलाव

जोशी को संरचनात्मक खामियों को रोकने के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के भीतर प्रशासनिक परिवर्तनों और सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने की देखरेख करनी होगी। NTA ही NEET परीक्षा का आयोजन कराती है।

NEET 2026 के पेपर लीक में गिरफ्तार किए गए कई प्रोफेसर NTA से जुड़े हैं।

अगले साल से NEET को ऑनलाइन मोड में करवाया जाएगा। इसके लिए बड़े पैमाने पर बदलाव और जिम्मेदारी को सुनिश्चित करना होगा।

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NEP

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर जोर

जोशी को राज्यों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को जारी रखना होगा। इसके तहत लाई गई तीन भाषा नीति पर खूब विवाद हो रहा है। खासतौर से दक्षिणी राज्य इस नीति का विरोध कर रहे हैं, जहां इसने हिंदी भाषा को थोंपने जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बहस को जन्म दे दिया है।

इसे लागू करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा।

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अन्य चुनौतियां

ये चुनौतियां भी हैं सामने

जोशी को CBSE और NCERT के पाठ्यक्रम में जरूरी बदलावों पर काम करना होगा। मंत्रालय के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाते हुए लंबे समय से लंबित सुधारों को आगे बढ़ाना भी उनकी जिम्मेदारी होगी।

राज्य स्तर पर प्रतियोगी परिक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकना भी जरूरी होगा।

जोशी पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का काम संभाल रहे हैं। ऐसे में मंत्रालयों के कामकाज में संतुलन बनाए रखना भी चुनौती होगा।

परिचय

कौन हैं प्रल्हाद जोशी?

प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार 5 बार के सांसद हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई रेलवे स्कूल और हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से की। इसके बाद कर्नाटक विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की।

वे 2012 से 2016 तक कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्हें मजबूत संगठनात्मक क्षमता के लिए जाना जाता है। इससे पहले वह कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

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