केंद्र सरकार नगर निकायों को अपने पैरों पर खड़ा करेगी, केंद्र-राज्य पर निर्भरता होगी कम
क्या है खबर?
केंद्र सरकार नगर निकायों की राजस्व क्षमता को मजबूत करने और वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए काम कर रही है।। मिंट के मुताबिक, तेजी से बढ़ती जनसंख्या के बीच शहर बुनियादी ढांचे की कमी और असमान सेवा वितरण से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार उन्हें अधिक वित्तीय-प्रशासनिक स्वायत्तता देने पर विचार कर रही है। इसके लिए सरकार नगर निकायों को राज्य-केंद्र से मिलने वाले अनुदानों पर निर्भरता कम करके और उनकी राजस्व क्षमता को बढ़ाकर सशक्त बनाएगी।
बजट
आम बजट में पेश होगी प्रस्तावित योजना
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र फरवरी में पेश होने वाले आम बजट में प्रस्तावित ढांचे को पेश करेगी। इसके जरिए शहरी स्थानीय निकायों को संपत्ति कर सुधार और तर्कसंगत उपयोगकर्ता शुल्क जैसे तंत्रों के माध्यम से अधिक संसाधन जुटाने में सक्षम बनाया जाएगा। साथ ही शहरों को शहरी सेवाओं के वित्तपोषण और प्रबंधन में अधिक आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। बताया जा रहा है कि बार-बार सुधारों के बावजूद, भारत में नगरपालिका वित्त व्यवस्था अभी भी नाजुक बनी हुई है।
योजना
कमजोर नगर पालिकाओं को निगमों से जोड़ा जाएगा
रिपोर्ट के मुताबिक, योजना से नगर निगमों, नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों को दीर्घकालिक अवसंरचना निवेश के लिए नगरपालिका बांड और ग्रीन बांड जैसे बाजार आधारित वित्तपोषण साधनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। सूरत, गाजियाबाद, इंदौर, वडोदरा, अहमदाबाद और पिंपरी-चिंचवड जैसे शहर शहरी परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए पहले ही नगरपालिका ग्रीन बांड का उपयोग कर चुके हैं। सरकार कमजोर नगरपालिकाओं को बेहतर निगमों के साथ जोड़ा सकती है, ताकि वे बेहतर शासन और वित्तीय प्रथाओं को अपनाएं।