केंद्र सरकार ने SC-ST आरक्षण में आय आधारित उप-कोटा की मांग को ठुकराया
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया कि आरक्षित श्रेणियों के भीतर आय-आधारित उप-कोटा लागू नहीं किया जा सकता। केंद्र ने उप-कोटा लागू करने की मांग वाली याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण ऐतिहासिक और सामाजिक असमानता पर आधारित है, न कि आर्थिक स्थिति पर। केंद्र ने कहा कि इसे केवल आर्थिक मानदंडों के आधार पर पुनर्गठित नहीं कर सकते।
आरक्षण
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की ओर से दायर जवाबी हलफनामे में केंद्र ने कहा कि याचिका आरक्षण पर नीति को फिर से तैयार करने के लिए न्यायिक निर्देश मांगती है, जो सरकार (कार्यपालिका-विधायिका) के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसे 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (न्यायालय के आदेश) से अनिवार्य नहीं कर सकते।
केंद्र ने SC-ST पर 'क्रीमी लेयर' सिद्धांत लागू करने का विरोध किया और कहा कि यह सिद्धांत केवल OBC तक सीमित रखा गया है।
सुनवाई
याचिका में क्या की गई है मांग?
याचिका रामाशंकर प्रजापति, अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, समता आंदोलन समिति और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं का समूह है, जिसपर पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा था।
याचिका में केंद्र को SC, ST, OBC और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणियों के भीतर आय-आधारित वरीयता लागू करने के निर्देश देने की मांग है।
याचिका में इन श्रेणियों के भीतर उप-वर्गीकरण की भी मांग है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को आरक्षण लाभों के वितरण में प्राथमिकता मिले।
विरोध
आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं हो सकती पहचान- केंद्र
मांग खारिज करते हुए केंद्र ने कहा कि अनुच्छेद 341, 342 और 342A के तहत संवैधानिक योजना केवल आय आधारित SC-ST और सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) की अधिसूचित सूचियों में परिवर्तन की अनुमति नहीं देती।
हलफनामे में कहा गया कि SC-ST और सामाजिक जनजाति की पहचान केवल आर्थिक आधार पर नहीं बल्कि जाति, जनजाति और सामाजिक पिछड़ेपन जैसे ऐतिहासिक और सामाजिक मानदंडों के आधार होनी चाहिए और संशोधन का अधिकार केवल संसद के पास है।