केंद्र सरकार जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC नियम पर विचार के लिए समिति बनाएगी
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादित नियमों पर फिर से विचार करने का समय दिया है, जिस पर केंद्र ने एक समिति बनाने की बात कही है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को कोर्ट को बताया कि वह शैक्षिण संस्थानों जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए UGC के हाल ही में नोटिफाई किए गए नियमों पर फिर से विचार करने के लिए एक समिति बनाएगी। UGC के नए नियमों को लेकर विरोध हो रहा है।
नियम
सरकार ने कोर्ट से क्या कहा?
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को बताया कि सरकार इस मामले की जांच कर रही है ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान हो और कोई भी तबका डरा हुआ महसूस न करे।
पीठ ने भी हर छात्र के हितों की रक्षा करने और यह पक्का करने की जरूरत पर ज़ोर दिया कि नई पीढ़ी का ध्यान रखा जाए।
सुनवाई
कोर्ट ने नियमों को लागू करने से रोका
कोर्ट नियमों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
UGC (हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशन्स में इक्विटी को बढ़ावा देना) रेगुलेशन, 2026 (रेगुलेशन) 13 जनवरी को अधिसूचित किया गया था, जो देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों लागू होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में इन नियमों को चुनौती दी गई है, क्योंकि 'सामान्य श्रेणी' के छात्रों को इसके शिकायत निवारण सिस्टम के तहत शिकायत करने से बाहर रखा गया है।
कोर्ट ने जनवरी में नियम को रोक दिया था।