उत्तर प्रदेश में रोजाना 343, पंजाब में 68 लोगों की हो रही कैंसर से मौत
क्या है खबर?
देश के उत्तर भारतीय राज्यों में कैंसर के मामले और इससे होने वाली मौतों के आंकड़े बढ़ रहे हैं। यह खुलासा संसद में हुआ है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में 2025 में कैंसर के कुल 15,69,793 मामले सामने आए और इससे होने वाली मौतों की अनुमानित संख्या 8,68,588 रही। देशभर में प्रतिदिन 2,380 लोग कैंसर से जान गंवा रहे रहे, जिसमें सबसे अधिक 343 मौतें उत्तर प्रदेश में हुई हैं।
कैंसर
उत्तर प्रदेश में ज्यादा है मरीजों और मृतकों की संख्या
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में पंजाब में रोजाना 68, हरियाणा में 50 और हिमाचल प्रदेश में 15 मौतें कैंसर के कारण हुईं हैं। पिछले साल पंजाब में कैंसर के 43,196 मामले सामने आए और इस बीमारी से 24,886 मौतें हुईं, जबकि हरियाणा में 33,395 मामले आए और 18,387 से अधिक मौतें दर्ज की गईं हैं। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा काफी अधिक है। यहां कैंसर के 2,26,125 मामले सामने आए और 1,25,184 मौत हुई।
बीमारी
2021 के मुकाबले 2025 में कितना बढ़ा कैंसर का प्रकोप?
कैंसर की बीमारी कितनी तेजी से बढ़ रही है, इसका भी आंकड़े खुलासा करते हैं। पंजाब में 2021 में 39,251 मामले थे, जो 2025 में 43,196 हो गए। हरियाणा में संख्या 30,015 से बढ़कर 33,395 हो गई। पंजाब में 2021 में कैंसर से 22,786 मौत हुई थी, जो 2025 में 24,886 हो गई। हरियाणा में मौतें 2021 में 16,543 से बढ़कर 2025 में 18,387 हो गई। हिमाचल प्रदेश में 2021 में 8,978 मामले थे, जो 2025 में 9,761 हो गए।
घातक
इन 5 राज्यों में हालत खराब
देश में कैंसर के मामले 2021 में 14,26,447 थे, जो 2025 में 15,69,793 हुए यानी 5 वर्षों में लगभग 1,43,000 मामले बढे़। देश में 2021 में 7,89,202 मौतें हुई, जो 2025 में 8,68,588 हो गई। कैंसर को लेकर 5 राज्य गंभीर स्थिति में है। उत्तर प्रदेश में 2025 में 2,26,125 नए मामले, महाराष्ट्र में 1,30,465 पश्चिम बंगाल में 1,21,639 बिहार में 1,18,136 और तमिलनाडु में 1,00,937 मामले सामने आए। कैंसर मृत्यु में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र आगे है।
कारण
क्या है कारण?
केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने संसद को बताया कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने सूचित किया है कि 2025 में एक समीक्षा हुई, जिसमें कहा गया कि औद्योगिक अपशिष्ट, कीटनाशक, भारी धातु और औषधियों जैसे प्रदूषकों द्वारा जल स्रोतों का दूषित होना एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। समीक्षा में साक्ष्यों के विश्लेषण से बताया गया कि औद्योगिक अपशिष्ट, कीटनाशक और भारी धातुओं सहित जल प्रदूषण और मलाशय एवं कोलोरेक्टल कैंसर के बीच संबंध है।