अभिषेक बनर्जी के खिलाफ FIR में नहीं होगी कोई दंडात्मक कार्रवाई, कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल की कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज 3 FIR में कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य ने सांसद बनर्जी की याचिका पर यह आदेश दिया। बनर्जी ने दावा किया था कि उनके खिलाफ दर्ज FIR राजनीतिक रूप से प्रेरित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा और FIR खारिज करने की मांग वाली याचिका 3 मामलों तक सीमित रहेगी।
नोटिस
हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं- कोर्ट
कोर्ट ने आदेश दिया कि तीनों मामलों में बनर्जी को पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की जरूरत नहीं। हालांकि, कोर्ट ने तृणमूल नेता को जांच में सहयोग करने और पुलिस के सामने पेश होने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस को बुलाने से पहले 48 घंटे का नोटिस देना होगा।
कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी FIR की प्रति बनर्जी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
जांच
चिकित्सा उपचार में नहीं होगी बाधा
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश बनर्जी के विदेश में चिकित्सा उपचार के लिए जाने में बाधा नहीं बनेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त को पारित एक आदेश में बनर्जी को विदेश जाकर आंखों का इलाज कराने की अनुमति दी है।
बता दें कि बनर्जी ने 16 FIR में राहत की मांगी थी, लेकिन अदालत ने खुद को उन 3 FIR तक सीमित रखा, जिनका विवरण बनर्जी की याचिका में विशेष तौर पर था।
मामला
क्या है मामला?
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भाजपा सरकार आने के बाद एक के बाद एक कई मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ टिप्पणियों के मामले अधिक हैं।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौारान TMC को 294 सदस्यीय विधानसभा में उसे केवल 80 सीटें ही मिलीं, जबकि भाजपा ने 208 सीटें जीतकर राज्य में पहली बार सरकार बनाई है।
ममता अपने निर्वाचन क्षेत्र भाबानीपुर वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से हार गईं।