भारत में डिमेंशिया का संकट, 2036 तक 1.69 करोड़ लोगों पर खतरा
भारत में डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अनुमान है कि 60 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों में, डिमेंशिया के मरीजों की संख्या अभी के 88 लाख से बढ़कर 2036 तक 1.69 करोड़ हो जाएगी।
विशेषज्ञ लोगों से गुजारिश कर रहे हैं कि वे अपनी याददाश्त या सोचने-समझने की क्षमता में हो रहे बदलावों को नजरअंदाज न करें। उनका कहना है कि ये बदलाव सिर्फ बुढ़ापे का सामान्य हिस्सा नहीं होते और अगर समय रहते इन पर ध्यान दिया जाए, तो काफी बड़ा फर्क आ सकता है।
अल्जाइमर है डिमेंशिया की मुख्य वजह
डिमेंशिया की मुख्य वजह अल्जाइमर की बीमारी होती है, जिसका 20 साल तक भी पता नहीं चल पाता। इस दौरान यह बीमारी धीरे-धीरे व्यक्ति की आजादी और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करती रहती है।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर इस बीमारी का जल्दी पता चल जाए, तो परिवार मरीज की देखभाल के लिए बेहतर योजना बना पाते हैं।
पूर्व मिस यूनिवर्स और अभिनेत्री लारा दत्ता ने एक देखभालकर्ता (केयरगिवर) के तौर पर अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि यह बीमारी पूरे परिवार को प्रभावित करती है, इसलिए लोगों को अपनी याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता (कॉग्निटिव हेल्थ) में आ रहे बदलावों पर जरूर ध्यान देना चाहिए।