BRICS में आज मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, चीन बोला- भारत के साथ मतभेद उचित तरीके से सुलझाएंगे
क्या है खबर?
नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होनी है। इससे पहले चीन ने बड़ा संदेश दिया है। भारत में बीजिंग के राजदूत जू फीहोंग ने कहा कि चीन, प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के मार्गदर्शन में भारत के साथ मिलकर काम करेगा और अपने मतभेदों को सुलझाएगा। चीनी राजदूत ने दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि की है।
बयान
चीन ने कहा- भारत के साथ मिलकर काम करेंगे
राजदूत जू फीहोंग ने कहा, ' कजान और तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद, यह लगातार तीसरा साल होगा जब दोनों नेता एक-दूसरे से मिलेंगे। चीन, दोनों नेताओं के रणनीतिक निर्देशों पर अमल करने, द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने, बातचीत और सहयोग बढ़ाने, मतभेदों को सही ढंग से सुलझाने और अच्छे पड़ोसी व एक-दूसरे की सफलता में मददगार साझेदार के तौर पर दोस्ती निभाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा।'
दौरा
7 साल बाद जिनपिंग का भारत दौरा
जिनपिंग 7 साल बाद भारत का दौरा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत में पहली आमने-सामने की बैठक होगी। गलवान के बाद करीब 4 साल तक LAC पर दोनों देशों के बीच तनाव रहा।
जिनपिंग चीन से रवाना हो चुके हैं और करीब 12:30 बजे नई दिल्ली पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक आज शाम 5:45 बजे निर्धारित है।
विदेश मंत्रालय
चीनी विदेश मंत्रालय बोला- सहयोग बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, "चीन प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन पर अमल करने, रणनीतिक स्तर पर और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से द्विपक्षीय संबंधों को संभालने, संचार को तेज करने, सहयोग बढ़ाने, मतभेदों को उचित रूप से संभालने और अच्छे पड़ोसी संबंधों का आनंद लेने वाले मित्र और एक-दूसरे की सफलता में मदद करने वाले साझेदार बनने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा।"
चर्चा
बैठक में किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, भारत को व्यापारियों पर चीन द्वारा लगाए गए वीजा प्रतिबंधों और प्रमुख प्रौद्योगिकियों और उपकरणों के निर्यात पर लगाए प्रतिबंधों को लेकर चिंता है।
भारत के लिए एक और मुद्दा ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से पर चीन द्वारा प्रस्तावित विशाल बांध है। नेपाल बाढ़ के बाद भारत ने पारदर्शिता और सूचना साझाकरण की मांग की है।
वहीं, बीजिंग का कहना है कि सीमा मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक विकास से अलग रखा जाना चाहिए।