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दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक, ईरान युद्ध के बीच भारत के सामने ये चुनौतियां
भारत में मई में BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होनी है (फाइल तस्वीर)

दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक, ईरान युद्ध के बीच भारत के सामने ये चुनौतियां

लेखन आबिद खान
Apr 01, 2026
03:54 pm

क्या है खबर?

भारत अगले महीने यानी मई में BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की मेजबानी करने जा रहा है। BRICS समूह की अध्यक्षता के दौरान भारत में ये पहली प्रमुख मंत्रिस्तरीय बैठक होने जा रही है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 14 और 15 मई को इस बैठक में शामिल होने दिल्ली आएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध और मौजूदा वैश्विक हालातों को देखते हुए भारत के सामने कई चुनौतियां हो सकती हैं।

थीम

क्या है BRICS सम्मेलन की थीम?

भारत 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' थीम के साथ BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शिखर सम्मेलन का लोगो जारी करते हुए कहा था कि भारत की अध्यक्षता 'मानवता को प्राथमिकता' देने वाले समाधानों पर केंद्रित होगी। उन्होंने कहा था, "वर्तमान वैश्विक परिवेश जटिल और परस्पर चुनौतियां प्रस्तुत करते हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, पेचीदा आर्थिक परिदृश्य, तकनीकी परिवर्तन और विकास में लगातार कमियां विभिन्न क्षेत्रों के देशों को प्रभावित कर रही हैं।"

बैठक

विदेश मंत्रियों की बैठक की क्या हैं प्राथमिकताएं?

विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंत्रिस्तरीय बैठक में भविष्योन्मुखी प्राथमिकताओं के एक समूह पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है, जिसकी शुरुआत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) से होगी। जलवायु वित्त एक और प्रमुख स्तंभ होगा, जिसमें विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर बोझ डाले बिना हरित ऊर्जा परिवर्तन का समर्थन करने वाला ढांचा तैयार करने के प्रयास शामिल होंगे। साथ ही भारत समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलावों की वकालत करेगा।

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ईरान युद्ध

ईरान युद्ध के चलते भारत के सामने चुनौतियां

ईरान युद्ध के चलते इस बैठक को समूह की एकता की पहली परीक्षा माना जा रहा है। ईरान चाहता है कि BRICS अमेरिका-इजरायल के हमलों की निंदा करे। वहीं, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) चाहते हैं कि BRICS ईरान के खिलाफ सख्त प्रस्ताव लाए। ऐसे में भारत के लिए सहमति बनाना जटिल काम होगा। माना जा रहा है कि ईरान युद्ध का मुद्दा सबसे बड़ी प्राथमिकता के साथ छाया रहेगा।

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विशेषज्ञ

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, "यह भारत के लिए बहुत पेचीदा स्थिति है, क्योंकि ईरान BRICS का सदस्य है और सऊदी अरब भी। भारत और ईरान SCO के भी सदस्य हैं। यह मामला इसलिए और पेचीदा हो गया है, क्योंकि ईरान ने सऊदी अरब और UAE पर हमला किया है, जो BRICS के सदस्य हैं। ऐसे में भारत के लिए किसी का पक्ष लेना या खिलाफ जाना मुश्किल होगा।"

प्लस

BRICS के बारे में जानिए

BRICS प्रमुख उभरती हुए अर्थव्यवस्था वाले 5 देशों का समूह है। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल है। 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने इसकी स्थापना की थी। 2010 में दक्षिण अफ्रीका भी शामिल हुआ। 2024 में समूह में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और UAE को जोड़ा गया। BRICS देश वैश्विक जनसंख्या के 49.5 प्रतिशत, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के 26 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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