सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला: बॉम्बे हाई कोर्ट ने 22 लोगों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में 22 लोगों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है। इन बरी हुए लोगों में ज्यादातर गुजरात और राजस्थान के जूनियर पुलिस अधिकारी शामिल थे।
कोर्ट ने सोहराबुद्दीन के परिवार की अपील खारिज कर दी और साल 2018 के स्पेशल कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि किसी को भी दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके साथी तुलसीराम प्रजापति की साल 2005 और 2006 में कथित पुलिस मुठभेड़ों में मौत हो गई थी।
CBI ने बरी किए जाने के फैसले को स्वीकार किया, अपील नहीं करेगी
यह मामला कई सालों तक देशभर का ध्यान खींचता रहा। इसने भारत में पुलिस की कार्रवाईयों और कथित गैर-कानूनी हत्याओं पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने बताया कि उन्होंने 22 लोगों को निर्दोष ठहराए जाने के फैसले को स्वीकार कर लिया है और वे आगे अपील नहीं करेंगे। बहुत से लोगों का मानना है कि यह घटना याद दिलाती है कि जब शक्तिशाली संस्थाएं शामिल होती हैं, तो न्याय पाना कितना मुश्किल हो सकता है।