बॉम्बे हाईकोर्ट ने मालेगांव बम धमाके के चारों आरोपियों को बरी किया
क्या है खबर?
महाराष्ट्र के मालेगांव में साल 2006 में हुए बम धमाके मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी चारों आरोपियो को बरी कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपी लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर नरवरिया को निर्दोष माना और उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। बता दें कि मस्जिद के पास हुए इन धमाकों में 37 लोगो की जान चली गई थी।
फैसला
कोर्ट ने आरोप तय करने वाला आदेश रद्द किया
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांदक की पीठ ने आरोपियों की ओर से स्पेशल कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर यह फैसला सुनाया, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। इन चारों पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं में हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित विभिन्न आरोप लगाए गए थे। साथ ही इन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।
अन्य आरोपी
जुलाई, 2025 में NIA कोर्ट ने बरी किए थे 7 आरोपी
पिछले साल 31 जुलाई को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कोर्ट ने धमाका मामले में सभी 7 आरोपियों को बरी कर दिया था। इनमें पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी शामिल थे। इन सभी पर आतंकी साजिश रचने, हत्या और धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप थे। हालांकि, कोर्ट ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए सभी आरोप हटा दिए थे।
धमाके
धमाकों में गई थी 31 की जान
8 सितंबर. 2006 को नासिक जिले के मालेगांव में 4 बम धमाके हुए थे। 3 जुमे की नमाज के तुरंत बाद हमीदिया मस्जिद और बड़ा कब्रिस्तान के परिसर में और चौथा मुशावरत चौक में हुआ था। इन धमाकों में 31 लोगों की जान चली गई थी और 312 लोग घायल हुए थे। पहले राज्य आतंकरोधी दस्ते (ATS) ने मामले की जांच की थी लेकिन 2011 में NIA को मामला सौंपा गया।
टाइमलाइन
मामले को लेकर कब-क्या हुआ?
अक्टूबर 2008: महाराष्ट्र ATS ने जांच शुरू की, साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित सहित कई लोग गिरफ्तार हुए। 2011: जांच NIA को सौंपी गई। 2016: NIA ने साध्वी प्रज्ञा और 6 अन्य के खिलाफ मकोका हटाकर नई चार्जशीट दायर की, सबूतों के अभाव का हवाला दिया। 2017: कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा को जमानत मिल गई। 2018: NIA कोर्ट ने आरोप तय किए। 2025: अप्रैल में बहस पूरी हुई। इस दौरान कई गवाह अपने बयान से पलट गए।