बॉम्बे हाई कोर्ट ने अबू सलेम की अर्जी ठुकराई, 2030 तक जेल में रहना होगा
1993 के मुंबई बम धमाकों के आरोपी अबू सलेम ने जेल से जल्दी रिहाई के लिए अर्जी दी थी। उसका दावा था कि वह 25 साल की सजा पूरी कर चुका है, जिसमें मिली छूट भी शामिल है। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट उसकी इस दलील से सहमत नहीं हुआ और उसकी अर्जी को 'समय से पहले' की गई मांग बताकर खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, उसकी सजा 2030 में ही खत्म होगी।
पुर्तगाल से प्रत्यर्पण ने तय की अबू सलेम की जेल की अधिकतम अवधि
साल 2005 में सलेम को पुर्तगाल से भारत लाया गया था। उस समय पुर्तगाल के साथ एक समझौता हुआ था, जिसमें दो मुख्य शर्तें शामिल थीं: उसे कभी फांसी की सजा नहीं दी जाएगी और उसे ज्यादा से ज्यादा 25 साल की कैद होगी। महाराष्ट्र के जेल नियमों (रेमिशन सिस्टम) 1962 के तहत अच्छे व्यवहार का हवाला देते हुए सलेम ने अपनी रिहाई की मांग रखी थी। हालांकि, राज्य सरकार और CBI दोनों ने ही उसकी इस मांग का जोरदार विरोध किया। इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी 'अवैध हिरासत' की दलील को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने जेल अधिकारियों के हलफनामे के आधार पर बताया था कि सलेम ने अभी तक केवल 19 साल ही जेल में बिताए हैं।