बिहार में विक्रमशिला पुल टूटने के बाद जान हथेली पर लेकर नदी पार कर रहे लोग
क्या है खबर?
बिहार के भागलपुर में विक्रमशिला पुल टूटने के बाद भागलपुर से सीमांचल आने-जाने के लिए लोगों ने नया तरीका खोज लिया है। गंगा नदी को पार करने के लिए लोग छोटी-बड़ी नावों का इस्तेमाल कर रहे हैं और जान हथेली पर लेकर इस पार से उस पार आ-जा रहे हैं। इसकी जानकारी जिला प्रशासन को हुई तो उसने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना किराया निर्धारित कर दिया है और सरकारी नावें भी चलाई है।
यात्रा
रोजाना 12,000 से 15,000 लोग पार कर रहे नदी
इस 4.7 किलोमीटर पुल का 25 मीटर हिस्सा टूटने से भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल समेत कोसी और सीमांचल के 7 जिलों के लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। भागलपुर इलाके का सबसे बड़ा बाजार और इलाज का केंद्र है। यहां रोजाना लाखों लोग आते-जाते हैं। पुल के बाद गंगा नदी में बरारी घाट और महादेवपुर घाट के बीच सरकारी जहाज की 2-2 फेरी और 75 नावें चल रही हैं, जो रोज 12,000 से 15,000 यात्री को नदी पार करा रही है।
सफर
बिना लाइफ जैकेट के सफर
इंडिया टुडे के मुताबिक, सरकार की जल परिवहन की सेवा को सुरक्षित करने के भरपूर प्रयास किए गए हैं, लेकिन खतरा अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, जो यात्री नाव में सफर कर रहे हैं, उनमें सभी 45 से 50 मिनट तक बिना लाइफ जैकेट के होते हैं। कुछ लोग अपने पैसे से लाइफ जैकेट पहनकर यात्रा कर रहे हैं। इसके अलावा नावों का आपस में टकराने का खतरा भी बना हुआ है।
किराया
क्या है सरकारी इंतजाम?
रिपोर्ट के मुताबिक, बरारी घाट में सरकार ने अस्थाई यात्री शेड, सूचना केंद्र, हेल्थ कैंप, जीविका दीदी की रसोई का इंतजाम किया है। आपदा प्रबंधन प्राधिकारी के स्वयंसेवक यहां सक्रिय हैं, जो नाव में लोड तय कर रहे हैं। साथ ही, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) पेट्रोलिंग करती है। नाव यात्रा के लिए प्रति यात्री 50 रुपये, बच्चों के लिए 20 रुपये, मोटरसाइिकल और साइकिल केलिए 50-20 रुपये तय है। नाव परिचालन सुबह 5 से शाम 5 बजे तक है।
ट्विटर पोस्ट
पुल टूटने के बाद नावों से सवारी करते लोग
यह वीडियो विक्रमशिला सेतु के पास का है।
— अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj (@grafidon) May 11, 2026
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पुल टूटने के बाद भागलपुर से सीमांचल जाने वाले हजारों लोग रोज ऐसे सफर करने को मजबूर हैं।
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धूप… बारिश… आंधी…
और जान हथेली पर।
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जिस देश का राजा अरबों के विमान में उड़ता हो,
उस देश की जनता ऐसे ही सफर करती है।
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यही है “अमृतकाल” की असली… pic.twitter.com/85toEhssHg