नेतन्याहू के भविष्य का फैसला जल्द, भारत इजरायल चुनाव को करीब से क्यों देख रहा है?
क्या है खबर?
इजरायली जनता मंगलवार को आम चुनाव में मतदान कर रही है। आने वाले दिनों में इसके परिणाम तय करेंगे कि मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भविष्य क्या होगा। चुनाव पर न केवल अमेरिका और ईरान बल्कि भारत भी करीब से नजर रख रहा है। यह चुनाव ऐसे समय पर हो रहा है, जब 8 महीने पहले ही भारत और इजरायल के रिश्ते 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' तक बढ़े हैं। यह चुनाव भारत के लिए क्यों मायने रखता है? आइए, जानते हैं।
चुनाव
इजरायल में कैसे होता है चुनाव?
इजरायल में 70 लाख लोग 26वें नेसेट (संसद) के लिए वोट कर रहे हैं। यहां 120 सीटें हैं। यहां जनता सीधे प्रधानमंत्री के लिए बल्कि पार्टी के लिए वोट करती है।
सरकार बनाने के लिए 61 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होती है और यहां कभी भी किसी एक पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिला है, इसलिए यहां हर सरकार गठबंधन के सहारे रही है।
किसी भी पार्टी को सीटें जीतने के लिए 3.25 प्रतिशत की लिमिट पार करनी होगी।
मुकाबला
इजरायल में किसके बीच मुकाबला?
इजरायल में 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के बड़े हमले के बाद पहला आम चुनाव हो रहा है, जिसने गाजा युद्ध शुरू किया था।
चुनाव में नेतन्याहू की साख दांव पर हैं, जो दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी से है। उनको गादी आइजनकोट से कड़ी चुनौती मिल रही है, जो सैन्य प्रमुख रह चुके हैं। वह सेंट्रस्टिट याशर पार्टी से हैं।
इनके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट, लेफ्ट-विंग डेमोक्रेट्स के एविगडोर लिबरमैन समेत अन्य दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के गठबंधन शामिल हैं।
संबंध
भारत इजरायल चुनाव पर नजर क्यों रख रहा है?
भारत और इजरायल के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए, लेकिन 25 साल तक कोई प्रधानमंत्री इजरायल नहीं गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने पर इसमें तेजी दिखी। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी 2017 में इजरायल जाने वाले पहले प्रधानमंत्री बने।
इसके बाद नेतन्याहू 2018 में भारत आए और फरवरी 2026 में ईरान युद्ध से कुछ दिन पहले मोदी फिर इजरायल पहुंचे थे। उस दौरान रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा समेत 17 समझौते हुए थे।
रक्षा
इजरायल के साथ भारत का रक्षा पर ज्यादा जोर
दोनों देशों के बीच रक्षा समझौता प्रमुख है, क्योंकि इजरायल भारत के सबसे जरूरी हथियार और तकनीकी आपूर्तिकर्ताओं में है।
वर्ष 1999 में इजरायल ने करगिल युद्ध के दौरान भारत को रक्षा आपूर्ति शृंखला में मजबूती दी थी।
भारत इजरायल का सबसे बड़ा हथियार खरीदार है, जो 2020-2024 के बीच उसके रक्षा निर्यात का 34 प्रतिशत है, जिसमें बारक-8 मिसाइल, फाल्कन AWACS, स्पाइडर, हेरॉन ड्रोन आदि प्रणाली शामिल है।
नवंबर 2025 का रक्षा सहयोग सह-विकास और सह-उत्पादन पर आधारित है।
व्यापार
दोनों के बीच चल रही मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत
इजरायल और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 3.9 बिलियन डॉलर (37,000 करोड़ रुपये से अधिक) के आसपास है। इजरायल अगले 5 सालों में 50,000 तक भारतीय श्रमिकों को कोटा देगा।
यह चुनाव भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते पर भी बात कर रहे हैं।
दोनों के बीच कृषि नवाचार, साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, UPI-MASAV लिंकेज जैसी योजनाएं हैं। इन पर नई सरकार को अपना कमिटमेंट पक्का करना होगा।
संबंध
ईरान और खाड़ी देशों में संतुलन
ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले और इजरायल के साथ संबंधों ने भारत को मुश्किल में डाला हैं।
हालात तब और बिगड़ गए, जब फरवरी में प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरा के तुरंत बाद ईरान पर हमला हुआ। इसके अलावा, मोदी ने ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन पर कोई संदेश नहीं दिया।
भारत ईरान के नियंत्रण वाले संकरे समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर है, जहां से 80 प्रतिशत कच्चा तेल आता है। तनाव से आपूर्ति घटी है।
पहल
गाजा और फिलिस्तीन पर रुख
भारत हमेशा से फिलिस्तीन का समर्थन करता रहा है और प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल के प्रति अधिक झुकाव के बाद भी देश अपनी पुरानी बात पर कायम है।
आजाद फिलिस्तीन के साथ 2-देशों के समाधान का समर्थन करने के बाद भी इजरायल भारत के इस कदम से सहज दिखता है।
इजरायल में चुनाव के बाद इंडिया-मध्य पूर्व-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के आगे बढ़ाने का रास्ता तय होगा, जिसकी घोषणा सितंबर 2023 में दिल्ली में G-20 शिखर सम्मेलन में हुई थी।
संबंध
मोदी और नेतन्याहू की दोस्ती
इस चुनाव के बीच सबसे अधिक चर्चा नेतन्याहू और मोदी की दोस्ती को लेकर है, जिन्होंने अपने रिश्तों को 'शांति, नवाचार और खुशहाली के लिए 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' तक बढ़ाया।
नेतन्याहू ने 22 अक्टूबर को मोदी से फोन पर बात कर आपसी रिश्तों में तेजी की पुष्टि की और मोदी को इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस पर बुलाया है।
हालांकि, नेतन्याहू के दोबारा से जीतने पर इजरायल-भारत की नीतिगत निरंतरता जारी रहेगी, इसकी पूरी संभावना है।
असर
क्या चुनाव के बाद भारत-इजरायल के रिश्तों पर असर दिखेगा?
विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि चुनाव के बाद सरकार बदलने से भारत-इजरायल के रिश्तों में कोई खास बदलाव नहीं आएगा क्योंकि दोनों देशों की साझा आवश्यकताएं हैं।
दोनों देशों के बीच रक्षा आपूर्ति, तकनीक सहयोग और साझा हित (आतंकवाद, सुरक्षा) जारी रहेंगे। आइसेनकोट भी भारत को महत्वपूर्ण साझेदार मानते हैं।
हालांकि, इजरायल की नई सरकार कुछ क्षेत्रों में अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकती हैं, जिसका भारत पर अनुकूल और प्रतिकूल असर दिख सकता है।